सेना से इस गांव का रिश्ता है 300 साल पुराना, यहां रहने वाले हर एक इंसान की है अपनी वीर गाथा

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नई दिल्ली। देश की सेवा करने की चाहत दिल में लिए भारत के कोने कोने से जवान सेना में भर्ती होते हैं। इन्हें अपनी जान की परवाह नहीं होती है। जिंदगी की बाजी लगाकर ये वीर सपूत मातृभूमि की सेवा अंतिम सांस तक करते हैं।

Madhavaram village

जैसा कि हम जानते हैं कि हर धर्म,समुदाय और जाति के लोग सेना में जाकर अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं, लेकिन आज हम आपको उस एक गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेना से करीब 300 साल पुराना रिश्ता है।

 

Madhavaram village

हम यहां आंध्र प्रदेश के माधवरम गांव की बात कर रहे हैं। सैन्य विरासत और शहादत के चलते इस गांव को लोगों के सामने लाने की आवश्यकता है। गोदावरी जिले में स्थित माधवरम गांव की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां के हर घर के किसी न किसी सदस्य का संबंध सेना से है और यह रिश्ता करीब 300 साल पुराना है।

 

Madhavaram village

गांव के लोगों का सेना से इस हद तक लगाव है कि यहां लोगों को सेना के पदों जैसे सूबेदार, मेजर, कैप्टन जैसे नामों से संबोधित किया जाता है और इन्हीं पदों के आधार पर बच्चों के भी नाम रखे जाते हैं। हर किसी की अपनी कहानी है जिसे वे बड़े ही गर्व से बताते हैं।

 

Madhavaram village

अब जरा बात करते हैं माधवरम गांव के इतिहास की जो कि वाकई में बेहद दिलचस्प है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 17वीं शताब्दी में गजपति राजवंश के राजा माधव वर्मा का यह गांव सैनिकों का ठिकाना हुआ करता है। अब जाहिर सी बात है कि उस दौरान कई सैनिकों को यहां लाकर बसाया गया। किले से लेकर हथियारों तक का जखीरा माधवरम गांव में लाया जाता था।

 

Madhavaram village

आलम तो यह है कि 17वीं शताब्दी से लेकर अब तक गांववासियों से सेना का रिश्ता अटूट है। एक रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया कि प्रथम विश्व युद्ध में भी माधवरम गांव के 90 सैनिकों ने हिस्सा लिया था और द्वितीय विश्व युद्ध में भी करीब 1000 लोगों ने अपना अहम योगदान दिया था।

 

Madhavaram village

सेना में इस गांव के लोगों के योगदान को देखते हुए इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की आवश्यकता है। वर्तमान समय में माधवरम गांव में सैनिक स्मारक है। यहां एक मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर को बनाने की भी बात की जा रही है।

Madhavaram village

सेना में इस गांव के निवासियों के अहम योगदान को देखते हुए पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने यहां मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर की नींव रखने की बात कही थी और यहां एक डिफेंस एकेडमी के खोलने की बात पर भी विचार की जा रही है।