इस वजह से भरी सड़क पर संत ने किया खुद को आग के हवाले, लोगों की खातिर दिया ये बलिदान

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नई दिल्ली। आज हम आपको उस संत के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी इच्छा से अपने शरीर को भस्म कर दिया। आइए हम आपको इतिहास के इस भयंकर हादसे के बारे में बताते हैं जिसके बारे में शायद अभी भी कई लोग नहीं जानते।

हम यहां साल 1963 के समय की बात कर रहे हैं। उन दिनों वियतनाम में 70 प्रतिशत लोग बौद्ध धर्म को मानने वाले थे, लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार उनका उत्पीड़न कर रही थी। कैथोलिक चर्च और ईसाईयों को प्राथमिकता देने की वजह से सरकार का बौद्ध धर्म के अनुयायियों के प्रति रवैया नकारात्मक था।

सरकार ने बौधिष्ठ झंडों को फहराना गैरकानूनी करार दिया। अब इसके कुछ ही दिनों बाद गौतम बुद्ध जयंती का अवसर होने के चलते लोगों ने इसका विरोध किया। मौके पर बौद्ध धर्मावलंबी सरकार के नियम का विरोध करते हुए बौद्ध झंडों को फहराते हुए Government Broadcasting Station की तरफ चल दिए।

 

 

Thich Quang Duc

पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाई जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई। वह 11 जून की सुबह थी। यहां के एक बौद्ध पगोडा से लगभग 350 बौद्ध भिक्षुक और संतों की एक टोली निकली। कम्बोडियन एम्बेसी के पास जैसे ही यह टोली पहुंची तब उनके सामने एक नीले रंग की कार आ रुकी। गाड़ी से थिच क्वांग डक अपने दो संतों के साथ उतरे।

 

Thich Quang Duc

उनमें से एक संत ने सड़क पर एक कुशन रखा जिस पर थिच क्वांग डक पद्मासन मुद्रा में बैठ गए और जाप करने लगे। दूसरा संत ने कार की डिक्की से 5 लीटर पेट्रोल से भरा हुआ गैलन निकाकर संत थिच क्वांग डक पर उड़ेल दिया। इसके बाद संत ने माचिस जलाकर खुद पर फेंक दिया। उनका शरीर धू-धू कर जलने लगा। चारों तरफ धुआं-धुआं हो गया।

 

Burning monk

आग बुझने के बाद उनके पार्थिव शरीर को पीले वस्त्र में लपेटकर पास स्थित एक पगोडा में ले जाया गया। उनके देह का दोबारा अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन हैरान कर देने वाली बात तो यह थी कि आग में दो—दो बार जलने के बाद भी उनका दिल नहीं जला। लोगों ने उनके हृदय को Xa Loi पगोडा में कांच के एक बॉक्स में सुरक्षित रख दिया। यह वाकई में किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं था।

 

That blue car

दरअसल, संत थिच क्वांग डक ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह दक्षिणी वियतनाम में सरकार का बौद्धों के प्रति इस दुर्व्यवहार को रोकना चाहते थे। जनता को बचाने के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया।

मरने से पूर्व थिच क्वांग डक के अंतिम शब्द कुछ इस प्रकार से थे — इससे पहले कि मैं अपनी आंखें बंद करूं और बुद्ध की शरण में जाऊं, मैं राष्ट्रपति Ngo Dinh Diem से आदरपूर्वक निवेदन करता हूं कि वह अपने देश के लोगों के प्रति दया दिखाएं और धार्मिक समानता बरतें।

इस घटना की पूरी दुनिया में चर्चा होने लगी। इस घटना से दक्षिणी वियतनामी सरकार का पतन हुआ और बौधिष्ठ लोगों को अत्याचारों से मुक्ति मिली।