जिसने भी सुना कि महादेव के गण नंदी दूध पी रहे हैं, वही मंदिर की ओर दौड़ पड़ा। नंदी के दूध पीने की सूचना शहर से लेकर देहात तक जंगल की आग की तरह फैली तो मंदिरों में भीड़ लग गई। मेरठ के साथ ही बागपत-शामली, बिजनौर और सहारनपुर में पूरे दिन इसी की चर्चा होती रही और शहर से लेकर देहात तक के मंदिरों में दूध पिलाने वालों की लाइन लग गई। हालांकि वैज्ञानिक इसे महज अफवाह ही बता रहे हैं। 

मेरठ में श्री खाटू श्याम मंदिर मुल्तान नगर, हस्तिनापुर, मुंडाली, किठौर, फलावदा, लौटी आदि गांवों में मंदिरों में नंदी को दूध पिलाने के लिए पूरे दिन लोगों की भीड़ जुटी रही। इसे लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चा होती रही। कहीं जल चढ़ाने पर गायब होने की चर्चा के बाद दूध पिलाने वाले उमड़े तो कहीं सिर्फ चम्मच से ही दूध पीने की बात सामने आई। 

शुक्रवार और शनिवार को भी कुछ क्षेत्रों में मूर्ति के दूध पीने की चर्चा सामने आई थी। रविवार को यह चर्चा कई जिलों तक पहुंच गई। शामली में जिलेभर के कई शिवालयों में नंदी की मूर्ति के दूध पीने की चर्चा के बाद अचानक भीड़ उमड़ने लगी। शाम तक यह चर्चा पूरे जिले में फैल गई।  नंदी को दूध पिलाने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक रही। 

बिजनौर के हल्दौर में प्रतिमा के दूध पीने की खबर फैलने पर मोहल्लेवासियों के साथ आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। देखते-देखते मंदिर में लोगों की लाइन लग गई। देर शाम तक अन्य मंदिरों में भी लोगों की भीड़ जुट गई। सहारनपुर में भी पूरे दिन नंदी के दूध पिलाने की चर्चा फैली रही। मंदिरों में लोगों की लाइन लगी रही। पुलिस का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

पहले भी उड़ी थी अफवाह, वैज्ञानिकों ने बताई थी सच्चाई

पहले भी इस तरह की अफवाहें उड़ी थीं तब वैज्ञानिकों ने तर्क सहित पूरे मामले को समझाया था। वैज्ञानिकों के अनुसार मूर्तियां कई मिश्रण से बनी होती हैं। इसके कई मिश्रण ऐसे होते हैं जिनके तरल पदार्थ के संपर्क में आने पर ऐसा ही नजारा सामने आता है।