डिजिटल इंण्डिया: गोरखपुर में 740 गांव में 55 करोड़ रुपये की योजना उपेक्षा की शिकार

0
6

केन्द्र सरकार की ‘नेशनल आप्टिकल फाईबर नेटवर्क’ (नोफन) योजना के तहत जिले के 470 ग्राम पंचायतों को हाईटेक बनाने व ग्रामीणों को हाईस्पीड इन्टरनेट सेवा मुहैया कराने को बीएसएनएल ने 55 करोड रुपये से ओएफसी लगाने के साथ ही राउटर व वाईफाई उपकरण लगा दिए। ताकि ग्रामीण घर बैठे ही आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र या खसरा-खतौनी की प्रतिलिपि प्राप्त कर सके। उन्हें तहसील का चक्क्रर नहीं काटना पड़े।  दो साल पहले सभी गांव हाईस्पीड इन्टरनेट सुविधा से लैश हो गए। जिम्मेदारों की लापरवाही से इन गांवो में लगे करोड़ो रुपये के उपकरण बिना इस्तेमाल के ही कबाड़ हो रहे हैं। 
दरअसल गांवो को हाईस्पीड इन्टरनेट सेवा मुहैया कराने के लिए केन्द्र सरकार ने 2015 में नोफन योजना लांच की। इसके पहले चरण में जनपद के सात ब्लाकों के 470 ग्राम पंचायतों को चयनित किया गया। भारत ब्राडबैण्ड निगम लिमिटेड ने बीएसएनएल को आप्टिकल फाइवर केबल ग्राम पंचायत भवन या प्राथमिक स्कूल तक लगाने की जिम्मेदारी सौपी। बीएसएनएल ने ठेकेदारों के माध्यम से पंचायत भवन व प्रा. स्कूल परिसर में ओएफसी, राउटर, माडम व वाईफाई सिस्टम लगाकर गांवों को हाईस्पीड इन्टरनेट सुविधा से जोड़ दिया। यह काम मार्च-18 में पूरा हो गया।

‘‘बीएसएनएल ने चयनित ग्राम पंचायतों में ओएफसी पहुचाने के साथ ही उपकरण भी लगा दिए। पहली जुलाई को सभी उपकरण व हाईस्पीड इन्टरनेट से लैश गांवों को बीबीएनएल को हैण्डओवर कर दिए गए। अब गांवों को हाईस्पीड इन्टनेट व वाईफाई की सुविधा देने की जिम्मेदारी उनकी है।’’
देवेन्द्र सिंह, पीजीएम गोरखपुर-महराजगंज एसएसए

 इसके बाद बीएसएनएल ने इन गांवों की सूची जिला प्रशासन को देकर सिस्टम व अन्य उपकरण हेण्डओवर कर दिया। जिला प्रशासन को इसके संचालन के लिए प्रतिनिधि नियुक्त करना था। बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार की अनुमति नहीं मिलने से प्रतिनिधि नियुक्त नहीं हो सके। ऐसे में हजारों ग्रामीण हाईस्पीड इन्टरनेट सुविधा का इंतजार दो साल से कर रहे है। गांवो में लगे ओएफसी, राउटर, माडम व वाईफाई सेट को हसरत भरी नजरों से रोजाना देखते है। इतना ही नहीं बिजली संकट से निपटने के लिए अधिकत्तर ग्रामों में सौलर पैनल भी लगाए गए है। यह सभी उपकरण बिना इस्तेमाल ही कबाड़ हो रहे है। बीएसएनएल अफसरों का कहना है कि हमने अपना काम समय से पूरा कर दिया। अब सिस्टम का इस्तेमाल नहीं हो रहा है तो इसके लिए बीबीएनएल जिम्मेदार है।