भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने हितों की रक्षा को लेकर देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। धोनी ने अपनी अर्ज़ी कोर्ट में दाखिल कर दी है और कहा है एक कंपनी ने उनके साथ छलावा किया है। कंपनी ने तय एग्रीमेंट को दरकिनार कर उनके भुगतान को रोका।

धोनी जिस कंपनी का जिक्र कर रहे हैं उस कंपनी का नाम आम्रपाली बिल्डर्स है। यह कंपनी पहले से ही विवादों में घिरी हुई है और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला भी चल रहा है। कंपनी पर आरोप है कि उसने लोगों से पैसा लेकर उन्हें घर मुहैया नहीं करवाए।

धोनी ने लगभग 39 करोड़ रुपए की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दायर की। आपको बता दें कि धोनी इस कंपनी के 2009 से 2016 तक बतौर ब्रांड एंबेसडर जुड़े थे। धोनी का कहना है कि इस दौरान के लिए उन्हें भुगतान नहीं किया गया। फ्लैट खरीदारों की तरह कोर्ट उनके हितों की भी रक्षा करे।

गौरतलब है कि आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को सुनवाई करनी थी। जज के छुट्टी पर चले जाने का कारण यह सुनवाई नहीं हो सकी। सुनने में आ रहा है कि कोर्ट धोनी की अर्जी स्वीकार करने के बाद अगली सुनवाई में इसे भी कार्रवाई में शामिल कर सकता है।

आपको बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आम्रपाली के सीएमडी और दो निदेशकों को गिरफ्तार करने के निर्देश जारी किए थे। साथ ही कोर्ट ने फॉरेंसिक एडिटर्स को सहयोग न करने पर करीब 200 कंपनी के लोगों को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था।

इतना ही नहीं कोर्ट ने कंपनी के सीएमडी अनिल शर्मा की व्यक्तिगत प्रॉपर्टी के साथ-साथ दक्षिण दिल्ली स्थित बंगला जब्त करने का आदेश जारी किया था. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कंपनी के फाइव स्टार होटल, लग्जरी कारें, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और होमबॉयर्स के पैसे से खरीदी गई अन्य संपत्ति को अटैच करने के निर्देश दिए थे.

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