आस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज हार से ज्यादा निराश होने की जरूरत नहीं, विश्व कप में अलग होगी टीम इंडिया

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नई दिल्ली : विश्व कप के पहले टीम इंडिया अपनी आखिरी एकदिवसीय सीरीज आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल चुकी है और 3-2 से हार भी चुकी है। इस पूरी सीरीज को टीम इंडिया ने विश्व कप के प्रयोग के तौर पर लिया था। इस चक्कर में उसने कई प्रयोग किए। इनमें से कुछ जरूरी थे तो कुछ एकदम बेतुके। इसका खामियाजा भी टीम इंडिया को सीरीज गंवा कर भुगतनी पड़ी। इन प्रयोगों के चक्कर में उसने यह भी नहीं सोचा कि वर्ल्ड कप से पहले आखिरी सीरीज में हार का असर टीम के मनोबल पर भी पड़ सकता है। अगर टूटे मनोबल से टीम विश्व कप में जाएगी तो टीम इंडिया की संभावनाएं भी धूमिल हो सकती है। पूरी सीरीज के दौरान सही संतुलन तलाशने की कोशिश में टीम में ही कई बार असंतुलन पैदा हो गया। बल्लेबाजी क्रम से लेकर कई बदलाव किए गए तो चार गेंदबाजों के साथ उतरने का दांव भी उल्टा पड़ा।

कई खिलाड़ियों को दिया मौका
भारतीय टीम पहले, दूसरे और तीसरे मैच में तो करीब-करीब एक-सी टीम लेकर उतरी। लेकिन यह संतुलित टीम नहीं थी। हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी में सिर्फ चार विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ टीम उतरी, जिसका उसे खामियाजा भुगतना पड़ा। हालांकि पहले दो मैच में जीतने और गेंदबाजी में केदार जाधव ठीक-ठाक चल जाने से यह कमी छिप गई, लेकिन इसका असर दूसरे, तीसरे और चौथे मैच में दिखा, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरे मैच में आखिरी ओवर में जीत के लिए 11 रनों की दरकार थी, लेकिन लक्ष्य बचाने के लिए अंतिम ओवर फेंकने के लिए भारत के पास किसी ऐसे मुख्य गेंदबाज का ओवर नहीं बचा था, जिस पर भरोसा हो कि ऐसी परिस्थिति के लिए वह सबसे सटीक गेंदबाज है। मजबूरी में विराट ने विजय शंकर को अंतिम ओवर थमाया और पहली तथा तीसरी गेंद पर विकेट लेकर भारत को जीत दिला दी। यह चमत्कार था, लेकिन याद रखना होगा कि चमत्कार रोज-रोज नहीं होते। इसलिए भले ही इस प्रयोग से टीम इंडिया जीत गई, लेकिन एक संतुलित टीम की दृष्टि से इसे बेहतर प्रयोग नहीं कह सकते। इसके अलावा हार्दिक पांडया की गैरमौजूदगी में बॉलिंग आलराउंडर की जिम्मेदारी रविंद्र जडेजा को सौंपी गई, लेकिन वह अपनी इस भूमिका के साथ मिले चार मौकों में से एक में भी न्याय नहीं कर पाए। इस वजह से चौथे मैच में उनकी जगह युजवेंद्र चहल को मौका दिया गया, जो 10 ओवरों में 80 रन लुटा बैठे। यह अलग बात है कि वह गेंदबाजी में नहीं चले, लेकिन हरफनमौला की अपनी भूमिका में विफल जडेजा के विकल्प चहल तो कतई नहीं थे। टीम के पास इसके लिए कोई ठोस योजना नहीं थी कि अगर जडेजा विफल होते हैं तो उनकी जगह कौन लेगा।

विराट समेत बल्लेबाजों का क्रम बदलना
सीरीज में यह भी देखा गया कि टीम इंडिया कुछ बल्लेबाजों के क्रम को लेकर असमंजस में रही। विजय शंकर की बल्लेबाजी क्रम के साथ तो सबसे ज्यादा प्रयोग किए गए। पांचवें से लेकर सातवें क्रम तक पर उन्हें उतारा गया और हर मैच में उनको अलग-अलग भूमिका दी गई। कभी पारी संवारने की, कभी एंकर की, कभी पिंच हिटिंग की और कभी फिनिशर की। इस वजह से वह पूरी सीरीज में कंफ्यूज रहें कि आखिर उन्हें करना क्या है। इसके अलावा कप्तान विराट कोहली चौथे मैच में खुद चौथे क्रम पर उतरे और लोकेश राहुल को ओपनिंग की जगह तीसरे नंबर पर लाया गया। ये दोनों प्रयोग बेतुके ही कहे जाएंगे। इसलिए भी कि विराट नंबर तीन पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और लोकेश ने टी-20 सीरीज में बतौर सलामी बल्लेबाज बेहतर प्रदर्शन किया था। इसलिए अगर रायडू की जगह किसी को आजमाना था तो उस स्थान के दावेदार कम से कम राहुल कतई नहीं थे। इसके अलावा टीम इंडिया को इस सीरीज से सबक लेकर यह भी याद रखना होगा कि विश्व कप में उसे बल्लेबाजी क्रम के साथ ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए।

विश्व कप के चयन में विकल्पों का रखना होगा ध्यान
चौथे और पांचवें वनडे में महेंद्र सिंह धोनी को आराम देकर युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को मौका दिया गया। चौथे वनडे में इनकी बल्लेबाजी तो ठीक-ठाक रही, लेकिन वह विकेट के पीछे की अपनी भूमिका के साथ न्याय नहीं कर पाए। पिछले एक साल से वह टेस्ट टीम के स्थायी विकेटकीपर हैं और चयन समिति को उन पर इतना भरोसा है कि वह इनके आगे देख ही नहीं रहा। लेकिन शॉर्ट फॉर्मेट क्रिकेट में लगातार संघर्ष करते दिख रहे हैं, खासकर विकेट के पीछे, जो उनकी मुख्य भूमिका है। इसके अलावा काफी समय से कप्तानी का दायित्व संभाल रहे विराट कोहली भी महेंद्र सिंह धोनी की अनुपस्थिति में असहज दिखते हैं। विश्व कप से पहले टीम इंडिया को इन बातों पर ध्यान देना होगा।

परिणाम से वास्तविक आंकलन नहीं
अगर टीम इंडिया की बात की जाए तो वर्तमान प्रदर्शन से टीम से विश्व कप में कैसा करेगी, इसके बावजूद इसका वास्तविक आंकलन नहीं हो सकता। क्योंकि इस टीम में हार्दिक पांड्या नहीं थे। वह विश्व कप में भारत के लोअर मिडिल ऑर्डर को मजबूती देने के साथ गेंदबाजी को भी मजबूत करेंगे। इसके अलावा विश्व कप में टीम की बल्लेबाजी क्रम के साथ भी ज्यादा छेड़छाड़ नहीं होगी। इस आधार पर देखें तो हालात उतने भी बुरे नहीं हैं, जितने आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए सीरीज में नजर आए।

 

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