आइपीएल में राजनीतिक विज्ञापन आएंगे या नहीं, इस पर सोमवार को होगा निर्णय

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नई दिल्ली : स्टार इंडिया 23 मार्च से शुरू होने वाली इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) 2019 में राजनीतिक विज्ञापनों को दिखाना चाहता है। इसके लिए उसने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) से अपील की है। स्टार इंडिया बीसीसीआइ का मुख्य प्रसारणकर्ता है। उसने क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से इसकी इजाजत मांगी है, जबकि बीसीसीआई और स्टार के बीच हुए मीडिया अधिकार समझौता (एमआरए) में साफ तौर पर कहा गया है कि मैच के दौरान राजनीतिक या धार्मिक विज्ञापनों के लिए कोई जगह नहीं होगी।

सोमवार को होगी स्थिति स्पष्ट
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने सोमवार को इस अपील पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई है। बीसीसीआइ सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक इसकी उम्मीद कम है कि आइपीएल के दौरान राजनीतिक विज्ञापन दिखाने की अनुमति मिलेगी। सूत्र ने जानकारी दी कि सीओए की तीन सदस्यीय समिति सोमवार को बैठक में यह पता करने की कोशिश करेगी कि आखिर स्टार चाहता क्या है।
बीसीसीआइ और एमआरए के बीच पांच वर्षों (2018 से 2022 तक) के लिए हुए समझौते के आधार पर वह बीसीसीआइ अधिकृत मैच के दौरान किसी भी तरह का राजनीतिक और धार्मिक विज्ञापन नहीं दिखा सकता है।

पहले भी बीसीसीआइ कर चुका है मना
इस मामले में बीसीसीआइ का रुख एकदम स्पष्ट है। आइपीएल के दौरान पिछली बार भी जब प्रसारणकर्ताओं ने राजनीतिक विज्ञापन दिखाने के लिए बोर्ड से संपर्क किया गया था तो उसने स्पष्ट रूप से प्रसारणकर्ताओं को बता दिदया था कि खेल और राजनीति को दूर ही रखा जाए। इस बार भी इस बात की पूरी संभावना है कि उसका वही रुख कायम रहेगा।
स्टार इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि एमआरए के साथ हुए समझौते के अनुसार, वे किसी भी तरह का राजनीतिक या धार्मिक विज्ञापन नहीं दिखा सकते, इसके बावजूद अनुरोध आया है तो उसे सीधे स्पष्ट मना नहीं कर सकते। हम एक प्रसारणकर्ता हैं। इस देश में किसी भी विज्ञापनदाता को हमारे पास पहुंचने का और प्रायोजन अधिकार खरीदने का उसे हक है। हम उन्हें मना नहीं कर सकते। इसलिए यदि कोई राजनीतिक दल संपर्क करता है तो हम इसके लिए अनुमति लेने के लिए बाध्य हैं।

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