भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान की प्रेरणा हैं मैरीकॉम

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भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान और एआईएफएफ फुटबॉलर अवॉर्ड से सम्मानित सुनील छत्री ने कहा है कि वह ओलंपिक पदक विजेता महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम के प्रशंसक हैं और मैरीकॉम से उन्हें प्रेरणा मिलती है। छठी बार एआईएफएफ फुटबॉलर अवॉर्ड के लिए चुने जाने पर छेत्री ने कहा, “अवॉर्ड मिलने से बेहतर प्रदर्शन करने का उत्साह बढ़ता है और यह हमेशा हमारी जिम्मेदारियों का अहसास कराता है। सच कहूं तो मुझे कभी इतना वक्त नहीं मिला कि मैं यह सोच सकूं कि मैंने जीवन में क्या पाया है।”

छेत्री को यह अवॉर्ड छठी बार मिलने जा रहा है। वह इससे पहले वर्ष 2007, 2011, 2013, 2014 और 2017 में भी इस पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय गोलों के मामले में अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनल मेसी को पीछे छोड़ दिया है। छेत्री ने अहमदाबाद में चल रहे इंटर कॉन्टिनेंटल कप में ताजिकिस्तान के खिलाफ दो गोल कर मैसी को पीछे छोड़ा।

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उन्होंने कहा, “मुझे बस इस बात की खुशी है कि मैं अपने देश के लिए खेल रहा हूं और मैं इसका आनंद ले रहा हूं। मैंने कभी 100 से ज्यादा मैच खेलने को लेकर, कितने गोल किए या छह बार एआईएफएफ फुटबॉल अवॉर्ड मिलने को लेकर नहीं सोचा है। यह सब मैं तब सोचूंगा जब इस खेल से संन्यास ले लूंगा।” 

मैरीकॉम के लिए भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान छेत्री ने कहा, “मैं अपने अंदर ही प्रेरणा खोजता हूं। ऐसे कई लोग हैं जो अपने-अपने खेल में ऐसा करते हैं, जिनमें से एक मैरीकॉम हैं। उनकी कहानी अकल्पनीय है, वह छह बार की विश्व चैंपियन हैं और जुड़वा बच्चों की मां बनने के बाद भी उन्होंने विश्व चैंपियन का खिताब जीता है। इसके अलावा उन्होंने 14 स्वर्ण पदक जीते हैं जिनमें एशियाई खेल, एशिया चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेल भी शामिल हैं। मैरीकॉम ने भारत का नाम बढ़ाया है और मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं।”

भारत के स्टार स्ट्राइकर ने कहा, “फुटबॉल की दुनिया में क्रिस्टीयानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी हैं, जिनसें मैं प्रभावित हुआ हूं। पिछले 10-11 वषोर्ं में इन्होंने विश्व में फुटबॉल को एक नई पहचान दी है। अगर वह दो-तीन मैचों में स्कोर नहीं करते हैं तो लोग कहते हैं कि वह फॉर्म में नहीं हैं। जब भी मैं परेशान या थक जाता हूं मैं इन दोनों खिलाड़ियों के बारे में सोचता हूं।” 

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उन्होंने कहा, “मेरे करियर में फिलहाल सब ठीक चल रहा है। मैं अपने जीवन में सिर्फ खेलना चाहता हूं, बाकी सब मुझे भगवान ने दिया है। परिवार, खाना, शौहरत सब कुछ भगवान ने दिया है। मुझे बस अपने खेल के प्रति सकारात्मक रहना है। अगर मैं ऐसा नहीं कर पाता तो मुझे काफी अफसोस होगा।”

सुनील छेत्री ने कहा, “मुझे काफी गर्व होता है जब लोग मुझे मेरे रिकॉर्ड याद दिलाते हैं लेकिन मैं इन बातों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता हूं। मैं इसे अपने दिल पर नहीं लेता और ना ही इन बातों को साथ लेकर चलता हूं। मुझे पता है यह हमेशा नहीं चलने वाला है।”