ऐसे हैं महादेव शिव, सोमवार सूर्यास्त के समय ऐसा करते ही, हो जाती हैं मनोकामना पूरी

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भगवान शिव देवों के भी देव के रूप में पूजे जाते हैं, सृष्टि के कल्याणार्थ अनेक रूपों में धरती पर अवतार लेकर सबका कल्याण करते है । दुखियों के कष्टों का हरण कर लेते हैं । ऐसी मान्यता हैं कि सोमवार के दिन सूर्यास्त के समय शिवजी के नीचे दिये गये इन 19 नामों का केवल नाम जप या उच्चारण 108 बार करने से भोले बाबा अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं ।

 

1- वीरभद्र अवतार – भगवान शिव का यह अवतार तब हुआ था, जब दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में माता सती ने अपनी देह का त्याग किया था ।
2- पिप्पलाद अवतार – पिप्पलाद जी का स्मरण करने मात्र से शनि की पीड़ा दूर हो जाती है । शिव महापुराण के अनुसार स्वयं ब्रह्मा ने ही शिव के इस अवतार का नामकरण किया था ।
3- नंदी अवतार – भगवान शंकर सभी जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए नंदीश्वर अवतार भी शिव स्वरूप सभी जीवों से प्रेम का संदेश देता है । नंदी (बैल) कर्म का प्रतीक है, जिसका अर्थ है कर्म ही जीवन का मूल मंत्र है ।
4- भैरव अवतार – श्री शिव महापुराण में भैरव को भगवान शंकर जी का पूर्ण रूप बताया गया है । परम पवित्र काशी में भैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली ।
5- अश्वत्थामा – महाभारत के अनुसार पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा काल, क्रोध, यम व भगवान शंकर के अंशावतार थे ।

6- शरभावतार – शरभावतार में भगवान शंकर का स्वरूप आधा मृग तथा शेष शरभ पक्षी (पुराणों में वर्णित आठ पैरों वाला जंतु जो शेर से भी शक्तिशाली था) का था । इस अवतार में शिवजी ने नृसिंह भगवान की क्रोधाग्नि को शांत किया था ।
7- गृहपति अवतार – भगवान शंकर का सातवां अवतार है गृहपति । जिनका अवतार नर्मदा नदी के तट पर धर्मपुर नाम का एक नगर में हुआ था ।
8- ऋषि दुर्वासा – भगवान शंकर के विभिन्न अवतारों में ऋषि दुर्वासा का अवतार भी प्रमुख है, रुद्र के अंश से मुनिवर दुर्वासा ने जन्म लिया अंहकारी आतताईयों इस धरा की रक्षी की ।
9- हनुमान – भगवान शिव का हनुमान अवतार सभी अवतारों में श्रेष्ठ माना गया है, इस अवतार में भगवान शंकर ने एक वानर का रूप धरा था ।
10- वृषभ अवतार- भगवान शंकर ने विशेष परिस्थितियों में वृषभ अवतार लिया था, इस अवतार में भगवान शंकर ने विष्णु पुत्रों का संहार किया था ।

11- यतिनाथ अवतार -भगवान शंकर ने यतिनाथ अवतार लेकर अतिथि के महत्व का प्रतिपादन किया था । उन्होंने इस अवतार में अतिथि बनकर भील दम्पत्ति की परीक्षा ली थी ।
12- कृष्णदर्शन अवतार- भगवान शिव ने इस अवतार में यज्ञ आदि धार्मिक कार्यों के महत्व को बताया है, इसलिए यह अवतार पूर्णत: धर्म का प्रतीक है ।
13- अवधूत अवतार – भगवान शंकर ने अवधूत अवतार लेकर इंद्र के अंहकार को चूर किया था ।
14- भिक्षुवर्य अवतार – भगवान शंकर तो स्वयं देवों के देव हैं, संसार में जन्म लेने वाले हर प्राणी के जीवन के रक्षक भी हैं । भगवान शंकर का भिक्षुवर्य अवतार यही संदेश देता है ।
15- सुरेश्वर अवतार – इस अवतार में भगवान शंकर ने एक छोटे से बालक उपमन्यु की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे अपनी परम भक्ति और अमर पद का वरदान दिया ।

16- किरात अवतार – किरात अवतार में भगवान शंकर ने पाण्डुपुत्र अर्जुन की वीरता की परीक्षा ली थी और प्रसन्न होकर अर्जुन को कौरवों पर विजय का आशीर्वाद दिया ।
17- सुनटनर्तक अवतार – पार्वती के पिता हिमाचल से उनकी पुत्री का हाथ मागंने के लिए शिवजी ने सुनटनर्तक वेष धारण किया था ।
18- ब्रह्मचारी अवतार – जब शिवजी को पति रूप में पाने के लिए पार्वती ने घोर तप किया, तो पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिवजी ब्रह्मचारी का वेष धारण कर उनके पास पहुंचे थे ।
19- यक्ष अवतार – यक्ष अवतार शिवजी ने देवताओं के अनुचित और मिथ्या अभिमान को दूर करने के लिए धारण किया था ।