13 अप्रैल दिन शनिवार को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव श्री रामनवमी पर्व, यह पर्व पूरे हिन्दूस्तान में बहुत धुम धाम से मनाया जाता है । इस बार की रामनवमी की खास बात यह है की इस दिन पुष्य नक्षत्र भी रहेगा, इसलिए यह पर्व बुहत शुभ माना जा रहा है । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र मास की नवमी तिथि को दोपहर के 12 बजे हुआ हुआ था, और हर साल इसी समय इसी तिथि पर इसे मनाया जाता हैं । अगर आपके घर परिवार में कोई 6 माह से लेकर 1 साल तक का कोई छोटा बच्चा हो तो जरूर करें ये उपाय आपका बच्चा बड़ा होकर राम जी जैसा आज्ञाकारी, गुणवान सुसंस्कारी बन सकता है ।

 

पुष्य नक्षत्र में रामनवमी का पर्व पड़ने से बहुत ही शुभ संयोग बन जाता हैं, इस दिन पूरे देश में बहुत ही धुम धाम से यह पर्व राम जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है । अगर आपके घर में कोई छोटा बालक हो जिसकी आयु 6 माह से लेकर 1 साल तक की हो तो रामनवमी के दिन सुबह उसे गंगाजल मिले जल से स्नान कराकर राम जी की तरह अच्छे से तैयार कर लें । संभव हो तो वस्त्र रेशमी पितांबरी ही पहनावें । एक पालना या झूले को फूलों से सजाकर तैयार कर लें । आटे के 11, 21 या 108 दीपक बत्ती घी या तेल डालकर तैयार कर लें ।

 

अब सबसे पहले सभी दीपकों को श्रीराम नाम का उच्चारण करते हुये जलावें । दीपक जलाने के बाद ठीक 12 बजे राम रूपी बालक को झूले में डालकर वैदिक पद्दति से राम जी का विधिवत जन्मोत्व मनावें । बच्चें को चंदन या अष्टगंध का तिलक अनामिका अंगुली से लगाते हुये प्रार्थना करें की यह बालक बड़ा होकर भगवान श्रीराम की तरह आज्ञाकारी, गुणवान एवं संस्कारी बने । फूलों की माला पहनावें और आरती करें । पुष्य नक्षत्र योग 13 अप्रैल शनिवार को प्रातः बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 14 अप्रैल को सूर्योदय तक रहेगा ।
पूजन करने के बाद सभी लोग श्रीराम रामरक्षास्त्रोत, राम मंत्र, हनुमान चालीसा आदि का पाठ करें । अब जो दीपक जलाये थे उनमें से 5 दीपकों को एक थाली में लेकर- एक दीपक वहां रखें जहां राम रूपी बाल सोता हो, दूसरा दीपक घर के पूजा घर में रखे, तीसरा दीपक तिजोरी के सामने, चौथा बाहर तुलसी में एवं पांचवां दीपक घर की छत पर रखे दे । ऐसा करने से बालक को राम जी की कृपा से दिव्य वातावरण मिलता रहेगा, साथ ही घर में धन, सुख समृद्धि बनी रहेगी ।

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