ब्रुनेई में शरिया कानून मंजूर, समलैंगिक यौन संबंध रखने वालों को पत्थर मारकर मौत के घाट उतारने की सजा

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बंदार सेरी बगवान। दक्षिण-पूर्वी एशिया के एक छोटे से देश ब्रुनेई ने एक ऐसे कानून को पास किया है जिसको लेकर वैश्विक स्तर पर इसकी आलोचना हो रही है। इससे पहले भी इस कानून को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जाते रहे हैं। दरअसल बुधवार को ब्रनेई ने समलैंगिक यौन संबंधों और व्यभिचार के दोषियों को संगसार करने यानी की दोषी पाए जाने पर पत्थर मार कर मौत के घाट उतार देने की सजा के प्रावधान को मंजूरी दी है। इस संबंध में शरिया कानूनों को सदन में पेश किया गया। बता दें कि शरिया कानून में अलग-अलग अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है, जैसे चोरी करने पर हाथ-पैर काटने की सजा है। इस नए प्रावधान के मुताबिक, समलैंगिक अपराध में किसी को तभी सजा दी जाएगी जब वह खुद कबूल करेगा या फिर उन्हें ऐसा करते हुए कम से कम चार लोगों ने देखा हो। मालूम हो कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में समलैंगिकता को वैध करार दिया है।

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सुल्तान हसनल बोल्किया ने की नए कानून की घोषणा

बता दें कि बुधवार को ब्रुनेई के सुल्तान हसनाल बोल्किया ने इस नए कानून की घोषणा की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुल्तान हसनल बोल्किया ने बुधवार को एक सार्वजनिक भाषण में कहा, ‘मैं इस देश में इस्लामिक शिक्षाओं को और मजबूत होते देखना चाहता हूं।’ मालूम हो कि ब्रुनेई में समलैंगिकता पहले से ही प्रतिबंधित है। साथ ही इसके लिए अधिकतम 10 वर्ष की सज़ा का प्रावधान भी है।

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वैश्विक स्तर पर कानून का हो रहा है विरोध

इस कानून की घोषणा के बाद ब्रुनेई के समलैंगिक समुदाय ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसे मध्ययुगीन फैसला करार दिया है। ह्यूमन राइट्स वाच के एशिया क्षेत्र के उप निदेशक फिल राबर्टसन ने इस संहिता को बर्बर करार दिया। हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता जॉर्ज क्लूनी समेत कई हस्तियों ने इस फैसले को गलत बताया है और लोगों से अपील की है कि वे ब्रुनेई के सुल्तान के आलीशान होटलों का बहिष्कार करें। वहीं लंदन में ‘स्कूल ऑफ ओरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज’ के छात्रों ने स्कूल की इमारत का नाम ब्रुनेई गैलरी से हटाकर कुछ और करने की मांग की है। यूरोपीय संघ ने आलोचना करते हुए इस नए शरिया कानून को क्रूर बताया और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौते का उल्लंघन करार दिया है। बता दें कि ब्रुनेई बोर्नियो द्वीप पर स्थित है और यहां पर सुल्तान हसनाल का शासन है। उन्होंने 2013 में इस संहिता की योजना का ऐलान किया था।

 

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