…तो इसीलिए देश भर में बड़े दलों से गठबंधन नहीं चाहती है कांग्रेस!

7

नई दिल्ली। करीब डेढ़ साल से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि मोदी सरकार को हराने के लिए विपक्षी पार्टियों को एक मंच पर आना होगा। इसकी अगुवाई करते हुए कांग्रेस ने सभी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश भी की लेकिन लोकसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने अपनी चुनावी रणनीति बदल दी है। अब कांग्रेस पार्टी देश के सभी राज्‍यों में बड़े दलों के साथ गठबंधन करने के बजाए केवल सात राज्‍यों में बड़े दलों के मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। अन्‍य राज्‍यों की उसकी रणनीति छोटे-छोटे दलों के साथ गठजोड़ बनाकर मोदी को चुनौती देने की है।

क्या चाहती है कांग्रेस?
आजादी के 71 साल में करीब 60 वर्षों तक कांग्रेस ने शासन किया। इस लिहाज से देखें तो कांग्रेस पार्टी के पास सबसे बड़ी सियासी विरासत है। चूंकि हर राज्य में बड़े राजनीतिक क्षत्रपों के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने से कांग्रेस की छवि को बट्टा लग सकता है। इसलिए जिन राज्यों में उसे बड़े दलों के नेताओं पर भरोसा है और पहले भी उनके साथ केंद्र में काम करने का अनुभव है, उन्हीं के साथ कांग्रेस इस बार मोदी को हराने के लिए गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ना चाहती है।

क्यों बदला कांग्रेस का रुख
राजनीति के जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव जीतने और प्रियंका गांधी के सक्रिय रूप से सियासी मैदान में उतरने के बाद से कांग्रेस अध्यक्ष की टीम और कार्यकर्ताओं के उत्साह बढ़ रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता सियासी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर रुचि लेने लगे हैं। लंबे अरसे से घर बैठ गए पुराने कांग्रेसी नेता भी अब कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के पक्ष में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। यही वजह है कि पार्टी हर राज्य में बड़े दलों के साथ तालमेल के पक्ष में नहीं हैं।

इन राज्यों में बनाई दूरी
दिल्ली में शीला दीक्षित की राय को अहमियत देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी के साथ चुनाव पूर्व तालमेल पर फिलवक्त विराम लगा दिया है। हालांकि दिल्ली प्रभारी पीसी चाको आज भी आप से गठबंधन को लेकर सक्रिय हैं लेकिन ऐसा होने की उम्मीद बहुत कम है। आप नेता गोपाल राय ने भी अब गठबंधन से इनकार कर दिया है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी एक सीमा के बाद कांग्रेस ने अपने पैरों पर खड़ा होने का फैसला ले लिया। पंजाब में भी चुनाव पूर्व तालमेल को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की सलाह को अहमियत दी। कैप्टन किसी भी सूरत में आम आदमी के साथ तालमेल के पक्ष में नहीं थे।

आंध्र में दिया टीडीपी को झटका
तेलंगाना में विधानसभा चुनाव टीडीपी के साथ मिलकर लड़ने के बाद भी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस टीएमसी को महागठबंधन के पक्ष में नहीं है। पार्टी के इसी रुख को ध्यान में रखकर केंद्रीय चुनाव समिति ने टिकट बंटवारे के काम को आगे बढ़ा दिया है।

इन राज्यों में लिया गठजोड़ बनाने का निर्णय
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर में ही राजनीतिक गठबंधन चाहते हैं। तमिलनाडु में डीएमके, महाराष्ट्र में एनसीपी, बिहार में आरजेडी, रालोसपा और हम, झारखंड में झामुमो, राजद व अन्य, पश्चिम बंगाल में वाम दल, कर्नाटक में जेडीएस के साथ ही चुनाव पूर्व तालमेल की संभावना है। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस का नेशनल कांफ्रेस से तालमेल बना हुआ है। इसके आगे भी बने रहने के संकेत हैं।