अमेरिका के सांसदों ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर ‘गहरी चिंता’ जाहिर की है और भारत तथा पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूतों से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए हर संभव प्रयास करने को कहा है।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को पांच अगस्त को समाप्त कर दिया गया और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बांट दिया गया। पाकिस्तान इसका विरोध कर रहा है। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।

‘पाकिस्तान अपनी भलाई चाहता है, तो पीओके भारत को सौंप दे’

नयी दिल्ली और इस्लामाबाद में अमेरिकी राजदूतों केनेथ जस्टर और पॉल डब्ल्यू जोन्स को शुक्रवार को अमेरिकी सांसद ने पत्र लिखकर कहा कि ऐसी आशंका है कि इस संकट के परिणामस्वरूप भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में नरमी ही रहेगी।

पत्र में कहा गया है, ”यह स्थिति वैश्विक शांति और स्पष्ट तौर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। पाकिस्तान और भारत दोनों ही महत्वपूर्ण सहयोगी हैं और अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया सहित क्षेत्र में हमारे हितों के लिए बेहद जरूरी है।”

पत्र में दोनों देशों के अमेरिकी राजदूतों से अपील की गई है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए हर संभव प्रयास करें। इस पत्र पर इलहान उमर, राउल एम ग्रीजाल्वा, एंडी लेविन, जेम्स पी मैकगवर्न, टेड ल्यू, डोनाल्ड बेयर और एलन लोवेनथल के हस्ताक्षर हैं।