ऑस्ट्रेलिया के राजनेताओं ने रविवार को सरकार से श्रीलंकाई तमिल परिवार को निर्वासित नहीं करने का अनुरोध किया। इस तमिल दंपती और उनके ऑस्ट्रेलियाई मूल के दो बच्चों के समर्थन में निकाली गई राष्ट्रव्यापी रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। दंपती और उनके बच्चों को देश की सख्त आव्रजन नीतियों के तहत पकड़ा गया है।

अदालत द्वारा उनके निर्वासन पर रोक लगाने के बावजूद शनिवार को दंपति प्रिया तथा नदेसलिंगम और उनकी दो बेटियों चार वर्षीय कोपिका तथा दो वर्षीय थारुनिका को सुदूर क्रिसमस द्वीप के एक हिरासत केन्द्र ले जाया गया। यह परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि उन्हें श्रीलंका में उत्पीड़न का डर है।

संवाद समिति ऑस्ट्रेलियाई एसोसिएटेड प्रेस (एएपी) की खबर के अनुसार विपक्षी नेता एंथनी अल्बानी ने प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के समक्ष यह मुद्दा उठाया और इस मामले में आव्रजन मंत्री के हस्तक्षेप करने की जरूरत बताई। लेबर पार्टी के नेता ने सिडनी में पत्रकारों से कहा, ”इन लोगों को यहां ऑस्ट्रेलिया में बसाना चाहिए। यह सरकार की प्रवासन नीतियों को कमजोर नहीं करेगा। इससे यही स्पष्ट होगा कि सरकार उस बात को सुनने के लिए तैयार है जोकि समुदाय कहना चाह रहा है।”

ग्रीन्स नेता रिचर्ड डी नताले परिवार को हिरासत केंद्र में भेजने की सरकार की कार्रवाई को एक ”संवेदनहीन क्रूरता” बताया। प्रिया और नदेसलिंगम 2012 में नौका से ऑस्ट्रेलिया आये थे और 2013 में उन्होंने शरण मांगी थी। ऑस्ट्रेलिया में जन्मीं उनकी बेटियां कभी भी श्रीलंका नहीं गई है। इस बीच मेलबर्न और ऑस्ट्रेलिया के अन्य शहरों तथा नगरों में हुई रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और सरकार से इस परिवार को यहीं रहने देने का अनुरोध किया।

गृह मामलों के विभाग ने इससे पूर्व आदेश दिये थे कि इस परिवार को श्रीलंका भेजा जाये। हालांकि एक संघीय अदालत ने शुक्रवार को निर्वासन के खिलाफ अंतरिम आदेश की अवधि बुधवार तक बढ़ा दी थी। एबीसी न्यूज ने प्रिया के हवाले से रविवार को कहा कि उन्हें और उनके परिवार को क्वींसलैंड के अपने घर लौटने की उम्मीद है।