पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पेरिस आधारित वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की 27 सूत्री कार्य योजना के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए 12 सदस्यीय एक समिति गठित की है। मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई है। गौरतलब है कि आतंकी संगठनों को धन प्राप्त होने पर रोक लगाने में नाकाम रहने को लेकर कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान को आतंकी ”कालीसूची में डाल दिया गया। 

धन शोधन (मनी लाउंड्रिंग) रोधी निगरानी संस्था ‘एशिया पैसिफिक ग्रुप ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान को एक ‘फॉलोअपसूची में डाला और पाया कि यह देश आतंकवाद को धन मुहैया होने और धन शोधन से जुड़े 40 अनुपालन मानदंडों में 32 का अनुपालन नहीं किया है। 

डॉन अखबार की खबर के मुताबिक राष्ट्रीय वित्तीय कार्रवाई कार्य बल समन्वय समिति का नेतृत्व आर्थिक मामले विभाग मंत्री हम्माद अजहर करेंगे। पाक प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के मुताबिक समिति को एफएटीएफ पर राष्ट्रीय कोशिश को कारगर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति एफएटीएफ से जुड़े सभी कार्यों को 21 दिसंबर तक पूरा होना सुनिश्चित करेगी। 

पाकिस्तान अब अक्टूबर में एफएटीएफ कालीसूची से बचने पर ध्यान केंद्रित करेगा। उस वक्त एफएटीएफ की 27 सूत्री कार्य योजना पर 15 महीने की समय सीमा समाप्त हो रही है। लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद सहित आतंकी संगठनों के प्रति नरमी बरतने को लेकर पाकिस्तान एफएटीएफ की निगरानी के दायरे में है। 

पाकिस्तान के ‘ग्रे लिस्ट में बने रहने का यह मतलब होगा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष(आईएमएफ), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी)और यूरोपीय संघ (ईयू) वित्तीय मामलों में उसे कमतर आंकेगी। साथ ही मूडी, एस एंड पी और फिच जैसी रेटिंग एजेंसियां भी वित्तीय जोखिम के मामले में उसे अच्छी रेटिंग नहीं देंगी। इससे पाकिस्तान की वित्तीय समस्या बढ़ेंगी, जो सभी संभावित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मदद मांग रही है।