जम्मू-कश्मीर मामले में समर्थन हासिल करने के मामले में अंतरार्ष्ट्रीय जगत में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने अपनी निगाहें अब इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी (आर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) पर टिका दी हैं। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सूचना एवं प्रसारण मामलों की विशेष सहायक फिरौदस आशिक अवान ने निजी चैनलों से बातचीत में कहा कि ओआईसी की आवाज को फिर से जिंदा करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि ‘कश्मीर की आवाज को दबाया नहीं जा सके और वहां हो रहे मानवाधिकार हनन की घटनाएं अधिक प्रभावी तरीके से उठाई जा सकें।’

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समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, उन्होंने एक बार फिर अंतरार्ष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगाई कि वह ‘कश्मीर के हालात का संज्ञान ले। भारत पर अत्याचार को रोकने के लिए और मीडिया व मानवाधिकार संगठनों को घाटी के जमीनी हालात की जानकारी लेने के लिए वहां तक जाने देने के लिए दबाव बनाया जाए। पाकिस्तान इस मामले में मदद कर सकता है।’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान घरेलू और अंतरार्ष्ट्रीय, दोनों स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और सरकार इनसे निपटने के उपाय कर रही है।

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देश में आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध के मुद्दे पर अवान ने कहा कि किसी भी संगठन पर प्रतिबंध अंतरार्ष्ट्रीय दबाव के कारण नहीं लगाया गया है। इन संगठनों को राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत प्रतिबंधित किया गया है।