लाहौर। पाकिस्तान बीते एक दशक में दुनिया की नजरों से उतर चुका हैै। विश्व के किसी भी कोने में कोई आतंकी घटना होती है तो इसके तार पाकिस्तान से जुड़ने लगते हैं। इमरान सरकार इस छवि को सुधारने की कोशिश में लगी है मगर अब बहुत देर हो चुकी है। भारत पर लगातार हो रहे हमले में सीमापार से आए आतंकियों से ऐसे कई सबूत मिले हैं,जिसमें सामने आया है कि पाकिस्तान की सेना ही इन हमलों में शामिल है। विश्व के दबाव में आकर अब पाक सरकार के पास कड़े कदम उठाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। वैश्विक आतंकी मसूद अजर और हाफिज सईद को लेकर वह काफी सर्तक हो चुकी है। उनके द्वारा चलाए जा रहे मदरसों और संस्थाओं को वह बैन लगा रही है। इन दो आतंकियों पाकिस्तान पर आतंक का ऐसा गहरा धब्बा लगाया है कि इसे मिटाने में उसे काफी समय लग सकता है। इन दो आतंकियों ने पाकिस्तान पर ऐसा गहरा धब्बा लगाया है कि इसे मिटाने में उसे काफी समय लग सकता है। इनके संगठन जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दावा ने अपनी जड़ें पाकिस्तान में फैला ली हैं। कई मदरसे और संस्थाएं संगठन की मदद से रहीं हैं। यहां पर आतंकी की नई फसल को तैयार किया जाता है। युवाओं और बच्चों के दिलों में नफरत का जहर घोलकर उन्हें सीमापार युद्ध लड़ने के लिए भेजा जाता है।

30 हज़ार से अधिक मदरसे

हाल ही में पाकिस्तान ने ऐलान किया है कि 30 हज़ार से अधिक मदरसों को सरकारी नियंत्रण में लिया जाएगा। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने इस बात की घोषणा की। पाकिस्तान में जबसे चरमपंथ को बढ़ावा मिला है और अफगानिस्तान में मुजाहिदीन के दौर में सीआईए की मदद से जो फंडिंग रही, इन मदरसों में ही मुजाहिद तैयार करके वहां भेजे गए। उस वक्त से सिविल सोसाइटी के लोग और रिसर्चर ये कहते रहे हैं कि मदरसों की पढ़ाई का तरीका अच्छा नहीं है, जिससे चरमपंथी विचारधारा बनती है। इसलिए उन्हें मुख्यधारा के स्कूलों में लाने की ज़रूरत है।

नेशनल एक्शन प्लेन बना था

पेशावर में स्कूल हमले के बाद नेशनल एक्शन प्लेन बना था। इसके तहत चरमपंथ पर काबू पाने की बात कही गई थी। इसमें एक फैक्टर ये भी था कि स्कूलों और मदरसों में जो चरमपंथ है उसपर भी काबू पाया जाएगा। ये सब बहुत धीमी गति से चल रहा था। मगर सोमवार को सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ गफ़ूर द्वारा ऐलान किया गया कि नेशनल एक्शन योजना के तहत तीस हज़ार मदरसों को पाकिस्तान के शिक्षा मंत्रालय के तहत लाया जाएगा। इसे तीन चरणों में किया जाएगा।

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