तालिबान ने शुरू किया 'अल फतह' अभियान, अफगान सेना पर हमले तेज करने का ऐलान

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काबुल। तालिबान ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह अफगानिस्तान में सेना के ऊपर अपने हमले और भी तेज करेगा। बयान में फगान सैनिकों और पुलिस से सरकार को छोड़ने का आह्वान किया गया है। तालिबान ने यह भी चेतवानी दी कि अमरीकी वार्ता के जारी रहने तक वह अपने हमले और भी तेज कर सकता है। आपको बता दें कि अफगानिस्तान में हाल के हफ्तों में लड़ाई तेज हो गई है।

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अफगानिस्तान में तेज हुई लड़ाई

तालिबान की घोषणा से पहले ही अफगान सरकार ने मार्च में खालिद नाम से अपना खुद का आक्रामक अभियान शुरू किया। हाल के महीनों में अमरीका और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच बार-बार वार्ताओं के बाद भी अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया को बड़ा खतरा उत्पन्न हुआ है। 2001 में अमरीका समर्थित बलों ने तालिबान को सत्ता से हटा दिया था। 17 साल से अधिक समय तक चली लड़ाई के बाद भी अफगानिस्तान शांति से कोसों दूर है। उधर तालिबान ने एक बयान में कहा है कि वह आपरेशन अल-फतह शुरू कर रहा है। इसका उद्देश्य “अफगान इलाके पर अमरीकी कब्जे को मिटाना, आक्रमण और भ्रष्टाचार से मुस्लिम मातृभूमि को साफ करना, विश्वासयोग्य देशवासियों की रक्षा और सेवा करने के साथ-साथ एक इस्लामी व्यवस्था स्थापित करना” होगा।

तालिबान का ऐलान

तालिबान ने अपने अभियान की घोषणा करते हुए कहा, “हमारी मातृभूमि के बड़े हिस्से को दुश्मन से मुक्त कर दिया गया है, फिर भी विदेशी कब्जे वाली ताकतें हमारे इस्लामिक देश में सैन्य और राजनीतिक प्रभाव कायम कर रही हैं।” तालिबान ने यह आश्वासन दिया गया कि नागरिकों की रक्षा की जाएगी। बयान में कहा गया है कि अल-फतह ऑपरेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सेना, पुलिस और मिलिट्री सैन्य रैंकों में सेवारत देशवासियों को वापस बुलाना होगा। तालिबान ने कहा है कि सैनिकों को मुजाहिदीन में शामिल होने और जीवन और धन की सुरक्षा की गारंटी हासिल करने के लिए कहा जाएगा। आपको बता दें कि यह घोषणा दोहा में अमरीकी विशेष शांति खलीलज़ाद और तालिबान के अधिकारियों के बीच वार्ता की बहाली के कुछ दिन पहले हुई है।

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जारी है हिंसा का दौर

बता दें कि हाल के महीनों में अफगानिस्तान के काबुल जैसे शहरों में हाई-प्रोफाइल हमलों में कमी आई है, लेकिन प्रांतों में भारी लड़ाई अब भी जारी है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल अफगानिस्तान में 3804 नागरिक मारे गए थे। जबकि 2014 के बाद से 45,000 से अधिक अफगान सुरक्षा बलों की मौत हो गई है। इस सप्ताह अमरीकी सेना सेवा के तीन सदस्यों को काबुल के उत्तर में बगराम हवाई अड्डे के पास सड़क के किनारे बम से मार दिया गया था।

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