बीजिंग। चीन ने कहा है कि धर्मगुरु दलाई लामा (Dalai Lama ) के उत्तराधिकारी की घोषणा से पूर्व बीजिंग से अनुमति लेनी जरूरी होगी। चीन ने कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का फैसला चीनी कानूनों के अनुसार होना चाहिए। बता दें कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता छाती में संक्रमण के चलते नई दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हैं। बुधवार को 83 वर्षीय बौद्ध भिक्षु के अस्पताल में भर्ती होने के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि बीजिंग को 14 वें दलाई लामा की शारीरिक स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है लेकिन “जीवित बुद्ध” के पुनर्जन्म के बारे में बेहद ‘स्पष्ट नियम’ हैं।

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उत्तराधिकारी घोषित करने से पहले बीजिंग की अनुमति जरूरी

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु ने कहा, “दलाई लामा सहित सभी बुद्धों के पुनर्जन्म या उनकी नियुक्ति को चीनी कानूनों और नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसे फैसले धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक सम्मेलनों के अधीन होने चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि चीन अपने सभी नागरिकों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करता है। बता दें कि दलाई लामा को तिब्बत में चीनी सैनिकों के आगमन के बाद निर्वासन दे दिया गया था। उन पर राजनीतिक गतिविधियां चलने का आरोप है। 1959 में आत्म-निर्वासित निर्वासन के बाद से भारत में रह रहे हैं। 14वें दलाई लामा को तय धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत चुना गया था और तब उन्हें चीन की तत्कालीन सरकार ने मान्यता दी थी। लेकिन बाद में उनको चीन ने अपना दुश्मन मान लिया। अंतरराष्ट्रीय सेलिब्रिटी और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा दुनिया के कुछ शीर्ष नेताओं में हैं जो चीन की आंख में किरकिरी बने हुए हैं।

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अंतिम दलाई लामा?

यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि दलाई लामा के मरने के बाद उनके पुनर्जन्म यानी किसी और को दलाई लामा होने दिया जाएगा या नहीं। तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने हाल के वर्षों में संकेत दिया था कि वह यह पदवी रखने वाले अंतिम व्यक्ति हो सकते हैं। 2011 में आध्यात्मिक नेता द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि चीनी सरकार उनकी मृत्यु की प्रतीक्षा कर रही है और उसके बाद वह अपनी पसंद के 15 वें दलाई लामा को पदवी देंगे। लामा की संस्था को जारी रखना चाहिए। बता दें कि चीन आधिकारिक रूप से नास्तिक राज्य है। हालांकि राज्य की कम्युनिस्ट सरकार सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का वादा करती है, लेकिन पिछले एक दशक में धर्म पर बढ़ती रार के चिंताजनक संकेत मिले हैं। शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र में दो लाख मुस्लिम बहुसंख्यक उइगरों को उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं को खत्म करने की नीति के तहत हिरासत केंद्रों में रखा गया है। जबकि 2018 में अधिकारियों ने देश के दर्जनों प्रोटेस्टेंट ईसाई चर्चों के बारे में कहा कि वो अवैध रूप से बनाए या चलाए जा रहे थे।

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