नर्इ दिल्ली। उत्तरी यूरोप के देश के एस्टोनिया में देश के सबसे बड़े उद्योगपति जियो के लिए एक रिसर्च सेंटर स्थापित करने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार मुकेश अंबानी का वहां पर रिसर्च सेंटर खाेलने का मुख्य मकसद एस्टोनिया के डिजिटल समाज को समझना और यह जानना है कि वह भारत व भारतीयों को क्या फायदे दे सकते हैं। इसकी जानकारी भारत में एस्टोनिया के राजदूत रिहो क्रूव ने दी।

ई-रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत किया कार्यक्रम
वास्तव में एस्टोनिया के ई-रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत मुकेश अंबानी ने नामांकन किया है। मुकेश अंबानी के साथ देश के केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का नाम भी सामने आया है। भारत में एस्टोनिया के राजदूत रिहो क्रूव ने जानकारी देने हुए बताया कि एस्टोनिया के ई-रेजिडेंसी कार्यक्रम की शुरुआत 2014 में हुई थी और इसमें 2,174 लोग नामांकन कर चुके हैं जिनमें 2018 में 1,062 भारतीयों ने आवेदन किया।

एस्टोनिया में भारतीयों ने बनार्इ 286 कंपनियां
दूतावास ने जानकारी देते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में इस प्रक्रिया के तहत में एस्टोनिया की करीब 286 नई कंपनियां भारतीयों ने ही बनाई है, जिनमें अधिकांश स्टार्टअप व अन्य वेब डिजाइनिंग, सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग, कंटेंट राइटिंग व अन्य कार्य करने वाले फ्रीलांसर हैं। वहीं क्रूव ने इस बात की भी जानकारी की दी कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एस्टोनिया में जियो के लिए एक रिसर्च सेंटर स्थापित किया है, जिसका मकसद एस्टोनिया के डिजिटल समाज को समझना और यह जानना है कि वह भारत व भारतीयों को क्या फायदे दे सकते हैं।

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