शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी मनाई गई

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शुक्रवार को क्रांतिकारी भगत सिह की 111 वीं जयंती पाकिस्तान के लाहौर हाई कोर्ट में मनाई गई. भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने हाई कोर्ट के डेमोक्रेटिक हॉल में एक कार्यक्रम आयोजित किया था. इस कार्यक्रम में कई निर्वाचित प्रतिनिधि पहुंचे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की

सभा में दो प्रस्ताव भी पारित किए गए. पहले प्रस्ताव में भगत सिंह को फांसी देने के लिए ब्रिटिश महारानी को भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों से माफी मांगने की मांग की गई और दूसरे प्रस्ताव में उनकी याद में सिक्के और डाक टिकट जारी करने की मांग की गई.

भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को अपने स्कूलों के पाठ्यक्रम में शहीद भगत सिंह की कहानी शामिल करनी चाहिए और उन्हें उनके पराक्रम के लिए देश का शीर्ष नागरिक सम्मान (मरणोपरांत) दिया जाना चाहिए.

क्रांतिकारी भगत सिंह का जन्म पाकिस्तान के लायलपुर जिले के गांव बंगा में 28 सितंबर 1907 के दिन हुआ था. इसलिए इनसे जुड़ी अधिकतर चीजें भी पाकिस्तान में हैं. सिर्फ 23 साल की उम्र में शहादत को पाने वाले भगत सिंह आज पूरी दुनिया में माने जाते हैं. 12 साल की उम्र में जलियांवाला बाग हत्याकांड का भगत सिंह की सोच पर ऐसा असर पड़ा कि उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर देश को आजाद कराने की राह पकड़ ली थी.

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