मराठा आरक्षण पर राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने का निर्देश, 23 जनवरी को होगी सुनवाई

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महाराष्ट्र सरकार ने पिछले अधिवेशन के दौरान मराठा समुदाय के लोगों को आर्थिक आधार पर सरकारी नौकरी में आरक्षण देने का निर्णय लिया था। आरक्षण के बिल को ध्वनिमत से पास भी कर दिया था। लेकिन कई संगठनों औऱ विपक्षी दलों की ओर से मराठा आरक्षण को 16 फीसदी आरक्षण देने का विरोध करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई की, लेकिन फैसला नहीं हो पाया है। कोर्ट ने 18 जनवरी तक सरकार को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

इस मसले पर 23 जनवरी को सुनवाई होगी। बता दें कि सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण मामले में दायर याचिका की सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष न रखे जाने के बाद हाईकोर्ट ने 18 जनवरी तक के लिए सुनवाई को स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 18 जनवरी तक इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। मराठा आरक्षण के संदर्भ में अपना पक्ष रखने के लिए राज्य सरकार ने अधिक समय मांगा था, लेकिन सरकार की इस मांग को ठुकराते हुए कोर्ट ने 18 जनवरी तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जनवरी को हो सकती है।

न्यायाधीश रणजीत मोरे ने कहा कि मराठा आरक्षण के संबंध में पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है। सरकार को शुक्रवार तक अपना पक्ष रखना ही होगा। बता दें कि पिछले अधिवेशन में महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण देने वाले कानून को पास कर दिया था। नौकरी और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को महाराष्ट्र की विधानसभा और विधान परिषद में सर्वसम्मति से पास करा लिया था। हालांकि मुस्लिम संगठनों औऱ राजनीतिक पार्टियों की ओऱ से इस कानून के खिलाफ कोर्ट में चुनौती दी गई थी। मराठा आरक्षण के संदर्भ में याचिकाकर्ताओं की ओऱ से जो संदेह जताया गया था, सरकार ने उसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।

पिछली सुनवाई के दौरान बांबे हाईकोर्ट ने 11 जनवरी तक सरकार को हलफनामा पेश करने का भी निर्देश दिया था। लेकिन सरकार की ओऱ से अपना पक्ष नहीं रखा जा सका। एमआईएम के विधायक इम्तियाज जलील ने मराठा आरक्षण को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण को रद्द करने की मांग की है। इसके अलावा जयश्री पाटील ने भी मराठा आरक्षण कानून के खिलाफ याचिका दाखिल की है।

याचिकाकर्ता जयश्री पाटील के वकील गुणरत्न सदावर्ते ने न्यायालय से निवेदन किया था कि इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश रणजीत मोरे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष नहीं कराने की भी अपील की थी। लेकिन उनकी याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मराठा आरक्षण के संदर्भ में दाखिल की गई सभी याचिकाओं की सुनवाई 23 जनवरी को ही न्यायाधीश रणजीत मोरे और न्यायाधीश भारती डांगरे की खंडपीठ के समक्ष ही होगी।

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