त्योहारों से पहले कर्ज और सस्ता होने की उम्मीद बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में खुदरा महंगाई मामूली वृद्धि के बावजूद रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुरूप रहने से संभावना बढ़ी है। ब्रोकरेज कंपिनयों की राय है कि अगली मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत कटौती हो सकती है।

घरेलू और वैश्विक ब्रोकरेज कंपनियों के अनुसार महंगाई में कमी और औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर सुस्त पड़ने से केंद्रीय बैंक मौद्रिक रुख नरम कर सकता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अगस्त में खुदरा महंगाई मामूली वृद्धि के साथ 3.21 प्रतिशत रही है। इसी तरह जुलाई महीने में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) की वृद्धि दर सुस्त पड़कर 4.3 प्रतिशत रही है। विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन की वजह से आईआईपी की रफ्तार पिछले साल से सुस्त हुई है। 

* 0.40 प्रतिशत घटा सकता है रेपो दर अक्तूबर की बैठक में आरबीआई।
* 05 फीसदी पर आ सकती है रेपो दर घटकर, नौ साल में सबसे कम होगी।
* 5.4 पर है रेपो रेट मौजूदा समय में, जनवरी में यह 6.5 प्रतिशत पर थी।
* 110  आधार अंकों की कटौती कर चुका है आरबीआई लगातार चार कटौती में अभी तक।
* 04 अक्तूबर को आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति की घोषणा होगी।

मांग : निवेश बढ़ाने के लिए दरों में कटौती जरूरी 
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) के अनुसार निवेश को प्रोत्साहन के लिए वास्तविक ब्याज दरों में कटौती जरूरी है। ऐसे में रिजर्व बैंक को नीतिगत दरों में और कमी करनी होगी। बोफाएमएल के शोध नोट में कहा गया है कि चार अक्तूबर की मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत की कटौती की गुंजाइश बनती है। अगस्त महीने में महंगाई उम्मीद से कम यानी 3.2 प्रतिशत रही है इसलिए नीतिगत दरों में कटौती की संभावना है। आरबीआई के इस कदम से अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने में मदद मिलेगी।

भरोसा : महंगाई नियंत्रण में, मिलेगा फायदा
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती मुख्य रूप से महंगाई को देखते हुए करता है। अभी भी महंगाई आरबीआई के तय लक्ष्य के अंदर है। सरकार द्वारा महंगाई को 4 प्रतिशत पर बनाए रखने के लिए अनिवार्य किया गया है, जिसमें 2 प्रतिशत का ऊपर-नीचे तय किया गया है। इसलिए ब्याज दर में एक बार फिर से कटौती के भरोसे को बल मिला है। 

फायदा: मकान-वाहन की ईएमआई घटेगी
अगर आरबीआई अक्तूबर में लगतार पांचवीं बार रेपो रेट में कटौती करता है तो सभी तरह के लोन और सस्ते हो जाएंगे। आरबीआई ने पहले से ही बैंकों से एक अक्तूबर से कर्ज को रेपो रेट से जोड़ने का निर्देश दे चुका है। इसके चलते रेपो रेट में कटौती होते ही कर्ज सस्ता हो जाएगा। यानी होम लोन, कार लोन के साथ सभी तरह के लोन सस्ते होंगे। इससे आपके ऊपर ईएमआई का बोझ कम होगा।  

एक साल में कटौती
तारीख                 रेपो दर (%में)
01 अगस्त18       6.50
05 अक्तूबर 18      6.50
05 दिसंबर18       6.50
07 फरवरी19       6.25
04 अप्रैल 19        6.00
06 जून19            5.75
07 अगस्त19        5.40
04 अक्तूबर19       05.00
                 (-.40) अनुमानित

पूरे वित्त वर्ष में कटौती
घरेलू ब्रोकरेज कंपनी कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौद्रिक नीति समिति चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती करेगी। अक्टूबर में इसमें 0.40% कटौती की उम्मीद है।