इस साल पहली छमाही जनवरी से जून के दौरान पेश नए घरों में से मात्र 29 प्रतिशत सस्ते मकान की श्रेणी में आते हैं। संपत्ति सलाहकार एनारॉक ने यह जानकारी दी। सस्ते घरों की श्रेणी में आने वाली आवासीय इकाइयों पर सरकार कर प्रोत्साहन देती है। एनारॉक ने सरकार से मांग की है कि सस्ते मकानों की परिभाषा की 45 लाख रुपये की सीमा को कुछ उदार किया जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग कर रियायतों का लाभ उठा सकें।

सरकार ने हाल में बजट में सस्ते मकानों की मांग को प्रोत्साहन के लिए आवास ऋण के ब्याज पर कटौती की सीमा को डेढ़ लाख रुपये बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये कर दिया है। सस्ते मकानों की श्रेणी में निर्माणाधीन फ्लैटों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर सिर्फ एक प्रतिशत है। इसके अलावा केंद्र सरकार एक योजना के जरिये घर खरीदारों को ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराती है। 

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ”कुछ ही संख्या में डेवलपर्स द्वारा ऐसे घरों का निर्माण जो सस्ते मकानों की श्रेणी में आते हैं और जिनके खरीदार प्रोत्साहन पाने के पात्र हैं। चालू साल की पहली छमाही में शीर्ष सात शहरों में 1,39,490 आवासीय इकाइयों की आपूर्ति की गई। इनमें से सिर्फ 39,840 इकाइयां सस्ते मकानों की श्रेणी में आती हैं।

पुरी ने कहा कि सरकार द्वारा हाल में बजट में आवास ऋण के ब्याज पर कटौती की सीमा में 1.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है लेकिन शहरों में इसका लाभ बहुत कम लोगों को ही मिल पाएगा। सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसी भी घर की कीमत 45 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और इसका कॉरपेट क्षेत्र 60 वर्ग मीटर या निर्मित क्षेत्र 850 वर्ग फुट से अधिक नहीं होना चाहिए।