दस साल तक देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले डा. मनमोहन सिंह की बतौर सांसद विदाई बहुत खामोशी से हो गई। शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के तौर पर उनकी पांचवीं पारी का आखिरी दिन था। उन्हें अन्य सदस्यों की तरह न तो सदन में बतौर सांसद अपने अनुभव साझा करने को मौका मिला और न ही राज्यसभा की ओर से उन्हें विदाई दी गई। तीन दिन बाद संसद का सत्र शुरू होना है।
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लोकसभा के नए सदस्य शपथ लेंगे लेकिन राज्यसभा के सदस्यों के बीच उनके सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. मनमोहन सिंह रिटायर हो जाने के चलते सदन नहीं पहुंचेंगे। 14 जून को उनके साथ कांग्रेस के असम से ही एक अन्य सांसद सेंटियूस कुजुर भी रिटायर हो गए। 
 
डॉ. सिंह को राज्यसभा का एक और कार्यकाल मिलने की उम्मीद कम है। असम में जहां से वे सांसद चुनकर आते थे वहां विधायकों का अंकगणित उनके खिलाफ है। जिन राज्यों में छत्तीसगढ़, पंजाब, मध्यप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है वहां अप्रैल 2020 के पहले कोई संभावना नहीं है। गुजरात में दो खाली सीटों के लिए चुनाव होने हैं वहां कांग्रेस के 80 विधायक हैं लेकिन दोनों पर अलग-अलग चुनाव होने की स्थिति में वहां भी मुश्किलें हैं।

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