बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रीति राठी एसिड अटैक मामले में 25 वर्षीय व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन उसे पहले दिए गए मृत्युदंड की सजा को बदलकर आजीवन कारावास कर दिया। साल 2013 के इस मामले के दोषी अंकुर पंवार को साल 2015 में विशेष अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अंकुर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। यह पहला मामला था जब तेजाब हमले के किसी मामले में देश की किसी अदालत ने मृत्युदंड दिया था।
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न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति पीडी नाइक की खंडपीठ ने याचिका को आंशिक रूप से मंजूर किया। पीठ ने कहा, ‘भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 (हत्या) और 326 (बी) (तेजाब का इस्तेमाल करके जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया है। मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है।’

दरअसल, मई 2013 में अंकुर ने 23 वर्षीय नर्स प्रीति तब फेंका था जब वह दिल्ली से आ रही एक ट्रेन से दो मई 2013 को बांद्रा टर्मिनस पर उतरी थी। प्रीति की आंखों की रोशनी चली गई थी और वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। अस्पतालों में करीब एक महीने तक उसका उपचार चला और एक जून को बंबई अस्पताल में उसका निधन हो गया था।

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