लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एक उद्देश्य था, नरेंद्र मोदी को रोकना। राहुल अपने जनसभाओं या मीडिया से बात करने के दौरान कहते थे कि मोदी फिर से सत्ता में नहीं आने जा रहे हैं। लेकिन मोदी फिर से सत्ता में आए और 2014 के मुकाबले ज्यादा सीटें लेेकर आए। 
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राहुल गांधी गुजरात विधानसभा के बाद बदले-बदले से नजर आ रहे थे। उनमें आत्मविश्वास आ गया था, मीडिया के साथ लगातार बातें कर रहे थे और अपने आपको को विपक्षी नेता के तौर पर दिखा रहे थे। साथ ही राहुल जमीनी मुद्दों को लगातार उठा रहे थे लेकिन ये कांग्रेस में परिवर्तन लाने के लिए काफी नहीं था। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव में मोदी पर राफेल डील को लेकर खूब हमले किए और उनके छवि को जनता की नजर में धूमिल करने का प्रयास किया। वहीं वे दूसरे मुद्दे यानी न्याय को लेकर आए। न्याय योजना के तहत राहुल गरीब परिवार के सदस्य को सालाना 72 हजार देने का दावा कर रहे थे। हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि इस नारे को काफी देरी से लाया गया जिससे फायदा नहीं पो पाया। 
न्याय योजना को लेकर तब भाजपा ने कांग्रेस पर खूब निशाना साधा। भाजपा कहती रही कि दादी (इंदिरा गांधी) ने एक बार ‘गरीबी मिटाओ का नारा दिया था’ अब पोता (राहुल) इस नारे के सहारे वोट पाना चाहता है। चुनावी जनसभा में राहुल ने ‘चौकीदार चोर है’ के नारे खूब लगवाए, लेकिन भाजपा ने आखिरकार इसका तोड़ खोज लिया और सोशल मीडिया पर ‘मैं भी चौकीदार हूं’ कैंपेन चलाया। 

वर्तमान में भाजपा गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में सरकार चला रही जबकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। इन राज्यों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन से साफ दिख रहा है कि इन राज्यों में सत्ता विरोधी लहर इतनी जल्दी बन गई।

कांग्रेस अध्यक्ष अगर 2024 में वापसी करना चाहते हैं तो फिलहाल उन्हें संगठन को मजबूत करना होगा। साथ ही जनता के बीच भरोसा कायम करना जरूरी है जैसे प्रधानमंत्री मोदी ने जनता के बीच कायम किया है। वहीं राहुल को फुल टाइम राजनेता के मोड में आना होगा।

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