उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार की मुस्किले बढ़ाते हुए उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी है। उनपर शारदा चिटफंड घोटाले में कथित तौर पर सबूतों को मिटाने का आरोप है। अदालत ने कुमार को कानूनी सलाह लेने के लिए सात दिनों का समय दिया है। अदालत ने सीबीआई की उस अर्जी पर फैसला सुनाया है जिसमें उन्हें गिरफ्तारी से मिले अंतरिम संरक्षण को निष्प्रभावी करने की मांग की गई थी।
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सीबीआई ने अदालत से कहा था कि वह शारदा चिट फंड घोटाले की जांच के लिए बनी एसआईटी के प्रमुख रहे राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है। एजेंसी का कहना है कि पहली नजर में इस बात के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं कि राजीव कुमार ने इस मामले से जुड़े साक्ष्यों को कथित रूप से नष्ट करने या उनसे छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। उन्होंने इस मामले से जुड़े ‘ताकतवर लोगों को बचाने की कोशिश की।’ 

इससे पहले छह अप्रैल को सीबीआई की ने कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। सीबीआई के एक अधिकारी का कहना था कि चिटफंड मामले का ब्योरा जानने के लिए राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है। अदालत ने सीबीआई की याचिका पर फरवरी में कुमार के साथ पूछताछ की अनुमति दी थी लेकिन साथ ही कहा था कि वह उनको न तो गिरफ्तार कर सकती है और न ही उनके साथ किसी किस्म की जोर जबरदस्ती कर सकती है।

सीबीआई चाहती है कि शीर्ष अदालत के उस आदेश में से जोर जबरदस्ती और गिरफ्तारी पर रोक वाली शर्त हटा दी जाए। अधिकारी का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त सुरक्षा मिली हो तो वह पूरी बात का खुलासा नहीं करता। राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करने से कई तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है।

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