पश्चिम बंगाल में अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई जबरदस्त हिंसा के लिए बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर जनता को डराने के लिए टीएमसी नेताओं ने ये हमले कराए हैं। अगर केंद्रीय बलों के जवान न होते तो मंगलवार को उनका बचना भी संभव न होता। जबकि टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कुछ वीडियो शेयर कर आरोप लगाया है कि बीजेपी के बाहर से आए समर्थकों ने बंगाल में हिंसा को अंजाम दिया है।
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इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच जहां भाजपा इस बार सत्ता तक पहुंचने के लिए पश्चिम बंगाल से ढेरों उम्मीदें पाले बैठी है, वहीं भाजपा की बढ़ती ताकत ममता बनर्जी के लिए इस चुनाव के साथ-साथ भविष्य में भी बड़ा खतरा बन सकती है। यही वजह है कि दोनों ही दलों ने बंगाल में अपना सब कुछ झोंक रखा है। 

भाजपा का बड़ा सियासी दांव

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के जातीय समीकरणों के गठबंधन से भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछले चुनाव में यूपी की 80 में से 73 सीटों को हासिल करने वाले एनडीए को यहां कितने पर सिमटना पड़ जाएगा, कहना मुश्किल है। यूपी की इस संभावित कमी की भरपाई के लिए बीजेपी ने जिन राज्यों से उम्मीदें पालीं वे पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और पूर्वोत्तर के राज्य थे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्वोत्तर में बीजेपी को अच्छी सफलता मिलती दिख रही है, लेकिन नवीन पटनायक की जमीन उड़ीसा में बीजेपी बड़ी सेंध लगाने में नाकाम रही है। यही कारण है कि अब बीजेपी की सारी उम्मीदें पश्चिम बंगाल पर केंद्रित हो गई हैं।

भाजपा के केंद्रीय नेता लगातार पश्चिम बंगाल में डेरा डाले हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहित बीजेपी के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ लगातार वहां पर प्रचार कर रहे हैं। पूरी रणनीति के तहत पार्टी यहां वोटों के विभाजन की कोशिश कर रही है। उसकी रैलियों में जय श्रीराम का नारा केवल पश्चिम बंगाल में ही सुनने को मिल रहा है तो यह बेवजह नहीं है। उनकी सभाओं में उमड़ रही भीड़ ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा रही है।   
 

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