जादुई आंकड़ा छूने में भाजपा को देखना पड़ेगा सहयोगी दलों का मुंह

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सचिन मल्होत्रा, ज्योतिषशास्त्री
लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम चरण में है और 23 मई को नतीजे घोषित होंगे। ज्योतिषशास्त्र की गणना से ज्ञात होता है कि भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को पूर्णबहुमत के लिए 272 के आंकड़े को पाने में अन्य दलों के सहयोग की आवश्यकता पड़ सकती है जबकि कांग्रेस मजबूत विपक्षी दल बनकर उभरेगा। ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी इस बात का संकेत वृषभ लग्न की आज़ाद भारत की कुंडली भी दे रही है। गोचर में धनु राशि में चल रहे शनि आजाद भारत की कुंडली के दशम (राजसत्ता) भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव में केतु के साथ चल रहे हैं।

शनि और केतु की इस युति पर मिथुन राशि से पड़ रही राहु और मंगल की सम्मलित दृष्टि चुनाव परिणामों के तुरंत बाद बड़ी राजनीतिक उठापठक, सांसदों की खरीद-फरोख्त, दल-बदल और नए राजनीतिक समीकरणों के बल पर बेहद चौकाने वाले ढंग से वर्तमान सत्ताधारी दल भाजपा की वापसी के संकेत दे रहे हैं। आइए अब कुछ बड़े क्षेत्रीय दलों के नेताओं की कुंडलियों पर नजर डालते हैं जो आने वाले दिनों में नाटकीय ढंग से बड़े राजनीतिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण किरदार निभा सकते हैं।

1/6लोकसभा के बाद चमकेंगे माया के सितारे

15 जनवरी 1956 को दिल्ली में सायं 7 बजकर 50 मिनट पर कर्क लग्न में जन्मी मायावती के सितारे अब एक सकारात्मक और आश्चर्यजनक रुख लेने वाले हैं। पिछले चुनावों में हानि भाव के स्वामी बुध की महादशा में 2014 में मोदी लहर के चलते मायावती की पार्टी लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। किन्तु अब बुध में लाभ भाव के स्वामी शुक्र की अन्तर्दशा मायावती की कुंडली में शुरू हो चुकी है। लाभ भाव का स्वामी शुक्र उनकी कुंडली में भाग्य भाव के स्वामी गुरु से दृष्ट है जिससे इन्हें कोई बड़ा पद मिलने का योग बन रहा है।

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2/6चंद्रबाबू की कुर्सी पर संकट

अब दक्षिण भारत की ओर चलते हुए वहां के बड़े क्षत्रप आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की कुंडली पर नजर डालते हैं। 20 अप्रैल 1950 को सुबह 6 बजकर 43 मिनट पर आंध्रप्रदेश के चित्तूर में जन्मे चंद्रबाबू नायडू की कुंडली मेष लग्न की है। शनि में राहु की बुरी दशा में चल रहे नायडू की पार्टी टीडीपी को आंध्रप्रदेश में लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में बुरी हार का सामना करना पड़ सकता है। शनि उनकी कुंडली में अपनी शत्रु राशि सिंह में पंचम भाव में वक्री होकर बैठा है और राहु हानि के 12वें घर में पड़ा है। चंद्रबाबू नायडू की पार्टी की बुरी हार के बाद उनके मुखयमंत्री की कुर्सी जाने के ज्योतिषीय संकेत बन रहे हैं।

3/6वाई एएस आर निभाएंगे अहम भूमिका

नायडू के विरोधी वाई एएस आर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी की कुंडली कन्या लग्न की है। 21 दिसंबर 1972 को एक बजकर तीस मिनट पर पुलिवदया आंध्रप्रदेश में जन्मे जगनमोहन रेड्डी लग्नेश और दशमेश बुध की शुभ दशा में चल रहे हैं। इस शुभ दशा के प्रभाव से यह प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर पहुंच सकते हैं। इसके साथ यह केंद्र में अहम भूमिका भी निभा सकते हैं।

4/6केसीआर का जलवा रहेगा कायम

आंध्रप्रदेश से अलग हुए तेलंगाना में मुख्यमंत्री केसीआर का जलवा एक बार फिर दिखाई देगा। 17 फरवरी 1954 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर सिद्धिपट आंध्रप्रदेश में मेष लग्न में जन्मे के. चंद्रशेखर राव की कुंडली (केसीआर) में राजसत्ता के दशम भाव में राहु की महादशा में लाभ भाव में बैठे शुक्र की अन्तर्दशा उनको अब केंद्र में बड़ी भूमिका में ला सकता है।

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5/6नवीन पटनायक की कुंडली में यह संकेत

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की कुंडली मकर लग्न की है। 16 अक्टूबर 1946 को दोपहर एक बजे कटक में जन्मे नवीन पटनायक इस समय शुक्र में सूर्य की विंशोत्तरी दशा में चल रहे हैं जिसे ना तो बहुत अच्छा कहा जा सकता है ना बहुत बुरा, स्थिति सामान्य रहेगी। ओडिशा में भी आंध्रप्रदेश की भांति लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ हुए हैं। नवीन पटनायक की बीजू जनता दल वर्ष 2014 के चुनावों की भांति शानदार प्रदर्शन तो नहीं कर पाएगी लेकिन नवीन पटनायक एक बार फिर से मुख्यमंत्री बन पाने में कामयाब होंगे और केंद्र में वह भाजपा सरकार बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाते दिखेंगे। लेकिन अष्टमेश सूर्य की अन्तर्दशा के कारण नवीन पटनायक के स्वास्थ्य में अगले दो वर्षों में तेजी से गिरावट आएगी जिसके कारण वह मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं।

6/6तमिलनाडु में इनका बढ़ेगा प्रभाव

तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव आनेवाले हैं। जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद हो रहे इस लोकसभा चुनाव में एम.के. स्टालिन अपने पिता करुणानिधि की राजनीतिक विरासत को ऊंचाई पर ले जाते दिखेंगे। 1 मार्च 1953 को रात 11 बजकर 50 मिनट पर वृश्चिक लग्न में पैदा हुए स्टालिन शनि में शुक्र की परिवर्तनकारी दशा में चल रहे हैं। सहयोगी पार्टियों की मदद से यह तमिनाडु की राजनीति में अपना वर्चस्व बना पाएंगे।

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