पति के मरने पर दुर्योधन और रावण की पत्नी ने किया हैरान करने वाला काम

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हिंदुओं के पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामायण और महाभारत के सभी पात्र अपने आप में रहस्‍यमयी किरदार समेटे रोमांच से भरपूर हैं। एक ओर सीता मां का पतिव्रता धर्म महिलाओं को प्रेरित करता है तो वहीं रावण की पत्‍नी मंदोदरी और दुर्योधन की पत्‍नी भानुमती जैसे पात्र भी थे, जिन्‍होंने अपनी पति की मृत्‍यु के बाद अपने देवर से विवाह कर लिया। जबकि मंदोदरी की गिनती भी उन पतिव्रता स्त्रियों में होती थीं जो अपने कर्तव्‍य का सदैव पालन करती थीं। आइए जानते हैं इन दो ऐतिहासिक महिलाओं के बारे में रोचक बातें…

1/7रावण के समस्‍त कुल का नाश

जब मंदोदरी को इस बात का पता चला कि उनका पति रावण सीता मां का अपहरण करके ले आया है तो उन्‍हें बहुत दुख हुआ। उन्‍होंने रावण को समझा-बुझाकर सीता को फिर से राम को सौंपने की विनती। लेकिन रावण ने अपनी पत्‍नी की एक न सुनी और भगवान राम के साथ युद्ध करने में विभीषण को छोड़ेकर उसके समस्‍त कुल का नाश हो गया।

2/7विभीषण को मिला राजपाट

भगवान राम ने लंका के भले के लिए विभीषण की ताजपोशी करवाई और संपूर्ण राजपाट उन्‍हें सौंप दिया। तभी भगवान राम ने विनम्रता के साथ मंदोदरी के समक्ष विभीषण से विवाह प्रस्‍ताव रखा। उस वक्‍त मंदोदरी ने राम के प्रस्‍ताव को कोई तवज्‍जो नहीं दी।

3/7फिर कर लिया विवाह

विभीषण को सिहांसन मिलने के बाद मंदोदरी ने खुद को अपने महल में कैद कर लिया। वह न किसी से मिलती थी और न ही किसी कार्यक्रम में हिस्‍सा लेती थी। फिर कुछ समय पश्‍चात वह अपने महल से निकली और विभीषण से विवाह के लिए तैयार हो गई। ऐसे ही सुग्रीव ने भी बालि के मारे जाने के बाद उसकी पत्नीं से विवाह कर लिया था। कहते हैं कि बाली ने ऐसा करने के लिए सुग्रीव से खुद कहा था।

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4/7दुर्योधन ने किया था भानुमती से जबरन विवाह

राजा चंद्रवर्मा की पुत्री भानुमती स्‍वर्ग की अप्‍सराओं से भी अधिक सुंदर थी। राजा ने अपनी पुत्री के लिए सुयोग्‍य वर प्राप्‍त करने हेतु स्‍वयंवर रखा। उस सभा में दुर्योधन और कर्ण भी आए। भानुमती को देखकर दुर्योधन ने मन ही मन उससे विवाह करने की बात ठान ली।

5/7भानुमती को पसंद नहीं था दुर्योधन

 

स्‍वयंवर में वरमाला लेकर भानुमती दुर्योधन को छोड़कर आगे बढ़ गई। यह देखकर दुर्योधन को क्रोध आ गया और उसने जबरन वरमाला अपने गले में डलवा ली। वहां पहुंचे राजाओं ने जब उसका विरोध किया तो दुर्योधन ने सभी को युद्ध की चुनौती दे डाली।

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6/7जयद्रथ को छोड़कर सब पीछे हटे

दुर्योधन ने ऐसी चुनौदी दी कि वहां मौजूद जयद्रथ को छोड़कर सभी पीछे हट गए। दुर्योधन ने सभी को कर्ण से युद्ध करने की चुनौती दे डाली। कर्ण ने सभी को हरा डाला। फिर अंत में जयद्रथ के साथ भी 21 दिन तक चले युद्ध में कर्ण की ही जीत हुई। फिर अंत दुर्योधन और भानुमती का विवाह हुआ। भानुमती मन ही मन कर्ण को भी

7/7भानुमती ने अर्जुन से कर लिया विवाह

पांडवों से भयंकर दुश्‍मनी होने के बावजूद दुर्योधन की मृत्‍यु के पश्‍चात भानुमती ने अर्जुन से विवाह कर लिया। महाभारत युद्ध में अभिमन्यु ने भानुमती के पुत्र लक्ष्मण का वध किया था,वहीं दुर्योधन को भीम ने मारा था। इसके बावजूद अर्जुन के प्रति भानुमती के प्रेम में कोई कमी नहीं आई और दोनों का विवाह हो गया। दुर्योधन, कर्ण और अर्जुन के सा ऐसे अनोखे संबंधों के कारण ही यह कहावत प्रचलन में आई ‘कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा’।