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Saturday, August 15, 2020

रामायण सीरियल में राजशेखर ने जामवंत के अलवा निभाई पांच और भूमिकाएं

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जामवंत ने श्रीधर, मकराक्ष, अग्निदेव, शुक्रचार्य के साथ गुप्तचर आर्य सुमागध का भी किया अभिनय

प्रभुनाथ शुक्ल / भदोही

भदोही, 23 अप्रैल । लॉकडाउन में रामानंद सागर की तरफ़ से निर्मित रामायण बेहद लोकप्रिय हो रहा है। 33 साल बाद दूरदर्शन पर इसका प्रसारण किया जा रहा है। इसके बीच देश की एक पीढ़ी पूरी युवा हो चली है। महाभारत और रामायण की वजह से दूरदर्शन की टीआरपी बढ़ गई है। लेकिन आपको यह नहीँ मालूम होगा कि रामायण के कई कलाकारों ने एक से अधिक भूमिकाएं निभाई थीं। रामायण मेजामवंत का जीवंत अभिनय करने वाले राजशेखर उपाध्याय ने पांच से अधिक भूमिकाएं निभाई थी।

विभीषण की भूमिका के लिए हुआ था चयन बाद में रामानंद सागर ने ख़ुद दिलाई जामवंत की भूमिका

राजशेखर उपाध्याय भदोही जिले के हरिहरपुर गाँव के मूल निवासी हैं। मुम्बई में वह छोटे पर्दे की दुनिया में बड़ा नाम कमा चुके हैं। उन्होंने कई फिल्मों और टीवी सीरियल में काम करने के साथ टीवी सीरियल और फिल्मों का निर्माण भी किया है। सागर आर्ट की तरफ़ से निर्मित रामायण सीरियल पर उन्होंने विशेष बातचीत किया। इस दौरान उन्होंने कई रोचक जानकारी भी दिया। जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।

रामायण के जामवंत ने बताया कि उन्होंने जामवंत के अलावा पांच और अभिनय किया था। इसके पूर्व उन्होंने विक्रम बेताल में काम किया। यह सीरियल भी सागर आर्ट की तरफ़ से बनाया गया था। लेकिन सबसे अधिक लोकप्रिय भूमिका मेरी जामवंत की रही। इसमें श्रीराम और मेरे बीच 18 पेज का संवाद था। श्रीराम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल और हमारे बीच फिल्मांकन के दौरान कभी कोई रीटेक सीन नहीँ देना पड़ा। उपाध्याय ने बताया की ढाई साल से अधिक समय तक रामायण की शूटिंग उमरगांव में चली थी। 187 एपिसोड का निर्माण हुआ था। इसका पहला प्रसारण जून 1887 से हुआ था।

ढाई साल चली चली थीं रामायण की शूटिंग और 187 एपिसोड का हुआ निर्माण

राजशेखर उपाध्याय ने बताया कि हमने जामवंत के अलावा श्रीधर, खर के बेटे मकराक्ष, अग्निदेव, दैत्य गुरु शुक्रचार्य और अयोध्या के राजा श्रीराम के गुप्तचर आर्य सुमागध की भूमिका भी निभाई। श्रीराम और रावण दोनों दलों में हमने अभिनय किया। एक अभिनय हमने विभीषण के मंत्री का भी किया। जब रावण ने विभीषण को लंका से निकाल दिया था तो हम उसके साथ श्रीराम के पास आकाश मार्ग से समुद्र पार कर श्रीराम की शरण में आए। श्रीधर की भूमिका में हम राम वनवास के बाद गुरु वशिष्ठ के आदेश के बाद इसकी सूचना भरत को देने गए थे। अग्निदेव की भूमिका में श्रीराम के आदेश पर मां सीता की अग्निपरीक्षा हुई थीं। शुक्रचार्य के रुप में हमने मेघनाथ का यज्ञ कराया था। मकराक्ष बनकर हमने 21 रुप धारण कर श्रीराम से युध्द किया था। क्योंकि मेरे पिता खर का श्रीराम ने वध किया था। जिसके बाद हमारी मां ने श्रीराम की खोपड़ी में स्नान की प्रतिज्ञा की थी। जबकि आर्य सुमागध अयोध्या का गुप्तचर था। श्रीराम मेरे साथ गुप्त रुप से नगर का भ्रमण किया था और प्रजा में अपने राज के बारे में सही जानकारी हासिल किया। जिसके बाद सीता का अयोध्या से निष्कासन हुआ।

जामवंत ने बताया कि इसके पूर्व उन्हें विभीषण की भूमिका दी गई थीं। लेकिन रामानंद सागर हमें बेहद सम्मान देते थे और मेरी सलाह भी मानते थे। उन्होंने मुझे जामवंत की भूमिका दिलाई। सागर ने कहा यह अभिनय बेहद चर्चित होगा। उन्होंने बताया कि मेरी आवाज़ अधिक बुलंद थीं। सागर यानी बाबू जी मुझे पंडितजी कह कर बुलाते थे नाम कभी नहीँ लेते थे। क्योंकि उस समय कलाकारों का बेहद अकाल था। इसलिए अच्छे कलाकार नहीँ मिल पाते थे। इस लिए कई रामायण के कलाकारों ने एक से अधिक भूमिकाएं निभाई हैं। जब कोई अच्छी भूमिका होती थीं तो बापूजी सीधे बोलते थे यह रोल दमदार है और पंडितजी की आवाज़ अच्छी इस अभिनय को वही जीवंत करेंगे। जिसकी वजह से हमने जामवंत के अलावा पांच भूमिका निभाई। लॉकडाउन में पुनः रामायण के प्रसारण से एक बार फ़िर 33 साल पुरानी याद ताजा हो गई है। रामानंद सागर और उनके परिवार ने रामायण सीरियल को अमर कृति बना दिया है। श्रीराम के आदर्श चरित्र को उन्होंने आमजन तक पहुँचाया है। सरकार को उन्हें सम्मानित करना चाहिए।

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