नई दिल्ली

गर्मियों का सीजन शुरू होने के साथ ही इस साल देश के कई इलाकों से पानी की घोर किल्लत की खबरें आई हैं। कहीं पानी की कमी के चलते कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया तो कहीं तालाबों पर सुरक्षा बलों का पहरा है।
आइए जानते हैं, कितना भीषण है यह जल संकट…

पानी की कमी से वर्क फ्रॉम होम

चेन्नै में आईटी कंपनियों ने अपने एंप्लॉयीज को घर से ही काम करने का आदेश दिया है क्योंकि उनके पास ऑपरेशंस को जारी रखने के लिए पानी की कमी है। शहर में बीते करीब 200 दिनों से कोई बारिश नहीं हुई है। यही नहीं अगले तीन और महीनों तक चेन्नै में पानी का संकट बने रहने की आशंका है।

पशुओं के साथ रह रहे 50,000 किसान
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में करीब 50,000 किसान पशुओं के कैंपों में रहने लगे हैं। इसकी वजह यह है कि इन कैंपों में पानी की उपलब्धता है और जल स्रोत सूख रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने जिले में 500 पशु कैंप खोले हैं ताकि उन्हें उचित चारा-पानी मिल सके। ऐसी स्थिति में किसान पशुओं के साथ ही रह रहे हैं ताकि उन्हें भी पानी मिल सके। सूबे में फिलहाल ऐसे करीब 1,500 कैंप हैं।


स्कूलों में नहीं बंट रही मिड-डे मील


कर्नाटक में कई जगहों पर सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील न देने के मामले सामने आए हैं। ऐसा भी कई जगहों पर हुआ है कि स्कूल आधे दिन ही चलाए जा रहे हैं ताकि बच्चों को मील न देनी पड़े। कुल स्कूलों ने गर्मियों की छुट्टियां बढ़ा दी हैं। कुछ स्कूल पत्तों पर बच्चों का खाना परोस रहे हैं ताकि प्लेटें न धोनी पड़े, जिनमें पानी खर्च होता है।


मध्य प्रदेश में पुलिस सुरक्षा में जल


मध्य प्रदेश के पन्ना और इंदौर जैसे इलाकों में पानी को लेकर हुए संघर्ष के बाद पुलिस टैंकों की निगरानी कर रही है और तालाबों पर सुरक्षा घेरा है। पन्ना में पानी को लेकर हुई जंग में 8 लोग घायल हो गए थे। राजस्थान के भीलवाड़ा में भी पानी चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं और प्रशासन उनसे निपटने की कोशिशों में जुटा है।


कहां है कितना संकट


बांधों में जल का स्तर लगातार गिर रहा है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु को सूखे को लेकर अडवाइजरी जारी की थी। बीते 10 सालों के औसत के मुकाबले इन राज्यों में 91 जलाशयों में पानी 20 फीसदी से भी कम रह जाने पर केंद्र ने यह अडवाइजरी जारी की थी। पश्चिम भारत के 27 मुख्य जलस्त्रोतों और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों के 31 जलाशयों में उनकी क्षमता का कुल 11 फीसदी पानी ही मौजूद है। आंकड़ों के मुताबिक 7 जून तक देश का 43.5% हिस्सा सूखे की मार का सामना कर रहा था। कर्नाटक का 80 फीसदी और महाराष्ट्र का 72 पर्सेंट क्षेत्र सूखे की मार झेल रहा है।

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