अधूरी रह गई पिता का इलाज कराने की ख्वाहिश, शहीद होकर पंचतत्व में विलीन हो गए महेश

0

गाजीपुर

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवान महेश कुशवाहा का शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शुक्रवार को अंतिम संस्कार से पहले शहीद की अंतिम यात्रा में सीआरपीएफ के डीआईजी के साथ गाजीपुर के डीएम और एसपी भी शहीद जवान के पार्थिव शरीर को कंधा देने के लिए मौजूद रहे। वहीं इस अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद और भारत माता की जय के नारे भी लगाए। परिवार के मुताबिक, अनंतनाग के हमले में शहीद हुए महेश गुरुवार को अपने पिता का इलाज कराने के लिए घर आने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही वह ड्यूटी पर देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

बता दें कि कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले के दौरान सीआरपीएफ जवान महेश कुशवाहा ने वीरता का प्रदर्शन करते हुए आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। हमले में गोली लगने के बाद भी पीछे नहीं हटे महेश ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके एक आतंकी को मार गिराया था। आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए महेश का पार्थिव शरीर गुरुवार रात आठ बजे एयर इंडिया के विमान से वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर पहुंचा। यहां प्रशासनिक अधिकारियों और प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और फिर पार्थिव शरीर को गाजीपुर ले जाया गया।

इसके बाद शुक्रवार सबेरे शहीद महेश कुशवाहा को अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई। इसमें हजारों की संख्या में लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद, भारत माता की जय का नारा लगाते हुए श्मशान स्थल तक पहुंचे। पुलिस और सेना के जवानों ने जब शहीद को अंतिम सलामी दी तो एक बार फिर लोगों की आंखें छलक पड़ी। अंतिम संस्कार संपन्न होने तक हजारों लोग डटे रहें।

शहीद महेश को पुलिस अधिकारियों ने दिया कंधा

पढ़ें:
जम्मू-कश्मीर: अनंतनाग में सुरक्षाबलों पर आतंकी हमला, सीआरपीएफ के 5 जवान शहीद

अनंतनाग से पहले छत्तीसगढ़ में भी तैनाती

परिवार के मुताबिक, आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद महेश कुशवाहा अपने पीछे पत्नी के साथ मासूम बेटा-बेटी भी छोड़ गए हैं। महेश कुशवाहा 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। महेश की 4 जून 2009 में निर्मला से शादी हुई थी, इनसे दोनों के दो बच्चे एक बेटा आदित्य (6) और बेटी प्रिया (5) है। बेटा कक्षा एक में पढ़ाई करता है तो बेटी एलकेजी में पढ़ाई कर रही है। शहीद महेश कुशवाहा की पहली पोस्टिंग 2010 में छत्तीसगढ़ में हुई थी। इसके बाद उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सीआरपीएफ की 116वीं बटैलियन में हुई थी।

पिता के इलाज की इच्छा रह गई अधूरी

आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद महेश कुशवाहा को कश्मीर में तैनाती के दौरान पिता के हार्ट अटैक की जानकारी मिली। परिवार के लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के साथ महेश को भी फोन पर सूचना दी। पिता के बीमार होने की सूचना मिलने के बाद महेश ने गुरुवार को घर आने के लिए ट्रेन का टिकट भी बुक किया था, लेकिन बुधवार शाम ही मुठभेड़ में वह शहीद हो गए।