फरवरी से इंडोनेशिया में फंसे हैं 87 भारतीय नाविक, लगाई मदद की गुहार

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सुशील राव, हैदराबाद

करीब चार महीने पहले इंडोनेशिया में डिटेन किए गए पांच जहाजों पर तब से 87 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं। उनके दस्‍तावेज जब्‍त कर लिए गए हैं साथ ही उन्‍हें भारत लौटने की इजाजत भी नहीं दी जा रही है। इस वजह से ये नाविक बुरे हालात में रहने को मजबूर हैं।

इनमें से एक नाविक ने हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया से संपर्क करके कहा कि उसके साथ भारत के दूसरे हिस्‍से के नाविक भी है। नाम न उजागर करने की शर्त पर इस नाविक ने खुलासा किया कि चार और जहाजों को इंडोनेशिया के अधिकारियों ने हिरासत में लिया है लेकिन उन पर कोई भारतीय नहीं है।

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फरवरी में पकड़े थे ये जहाज

फरवरी में अधिकांश जहाज सिंगापुर स्‍ट्रेट या सिंगापुर जलसंधि में लंगर डालने पर हिरासत में लिए गए थे। इंडोनेशिया समुद्र के इस इलाके को अपनी सीमा में मानता है। शिपिंग उद्योग के सूत्रों का कहना है कि इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलयेशिया के बीच समुद्र सीमा को लेकर विवाद है।

तीन देशों में विवाद की वजह से रिहाई मुश्किल

जानकारों का मानना है कि तीन देशों के विवाद में उलझे होने की वजह से हिरासत में लिए गए जहाजों की रिहाई मुश्किल हो गई है। 19 फरवरी को स्‍टैंडर्ड क्‍लब नाम की बीमा कंपनी ने इस क्षेत्र में जहाजों के हिरासत में लिए जाने को लेकर एक अलर्ट जारी किया था। क्‍लब ने सिंगापुर शिपिंग असोसिएशन (एसएसए) की ओर से जारी एक अडवाइजरी का जिक्र किया था। साथ ही क्‍लब ने उन तमाम मामलों पर भी जोर डाला था जिनमें बाटम द्वीप (सिंगापुर स्‍ट्रेट के दक्षिणी हिस्‍से में) और बिनटन के पास (स्‍ट्रेट के पूर्वी हिस्‍से में) लंगर डाले हुए जहाजों को इंडोनेशिया के अधिकारियों ने ‘स्‍मगलिंग रोकने’ की कवायद का नाम देकर हिरासत में ले लिया था।

क्‍लब की ओर से कहा गया था, ‘जरूरी नहीं है कि सिंगापुर और मलक्‍का स्‍ट्रेट अंतरराष्‍ट्रीय समुद्र में हो, इस पर मलयेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया दावा कर सकते हैं।’

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केरल के नाविक ने की अपील

जहाज एमटी ब्लिस पर फंसे भारत के नागरिकों में केरल के एक थर्ड ऑफिसर हैं। इन्‍होंने अपनी रिहाई की प्रार्थना करते हुए कहा है, ‘मेरे पिता का देहांत 9 अप्रैल को हो गया है। मेरी पत्‍नी गर्भवती हैं, बच्‍चे का जन्‍म जून के पहले सप्‍ताह में हो सकता है। मेरी मां की भी तबीयत ठीक नहीं है।’

एक दूसरे नाविक ने बताया कि वह सिंगापुर में एक जहाज पर सवार हुए थे जो इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलयेशिया में व्‍यापार करता था। 1 फरवरी को जहाज ने आउटर पोर्ट लिमिट में लंगर डाला। उनके शब्‍दों में, ‘9 फरवरी को इंडोनेशिया की नेवी जहाज पर आ गई और हमसे कहा कि हमने उनके अधिकारक्षेत्र में बिना उनकी अनुमति के जहाज का लंगर डाला है। उन्‍होंने जहाज के कप्‍तान से कहा कि जहाज को डिटेन कर लिया गया है और हम सभी बाटम की ओर कूच करें।’

सूत्रों का कहना है कि जहाज एमवी विन विन पर 20 भारतीय हैं, इसे 17 फरवरी को पकड़ा गया था। एमटी अफ्रा ओक को 12 फरवरी को पकड़ा गया, उस पर 21 भारतीय नागरिक हैं। 23 भारतीय एमटी एसजी पेगासस नामके जहाज पर 9 फरवरी से फंसे हैं।

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