एनसीईआरटी 14 साल बाद करिकुलम दिशानिर्देशों की करेगा समीक्षा

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मानस प्रतिम, नई दिल्ली

नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) की समीक्षा बहुत जल्द की जाएगी जिसे स्कूली शिक्षा में सुधारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। एनसीईआरटी के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से खास बातचीत में इसकी पुष्टि की।

ऋषिकेश ने बताया कि साल 2005 में प्रकाशित पिछले एनसीएफ की समीक्षा का प्रारंभिक काम शुरू हो चुका है और इसे लेकर कमिटी बहुत जल्द बनाई जाएगी। एनसीएफ देश में टीचिंग प्रैक्टिस पर दिशा-निर्देश देते हुए स्कूल सिलेबस को बनाने और पाठ्यपुस्तकों के लेखन को रूपरेखा प्रदान करता है।

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साल 1975, 1988, 2000 और 2005 में जारी किए गए पिछले चार एनसीएफ में शिक्षकों से छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया ताकि ‘बिना किसी बोझ के साथ सीखने’ को सुनिश्चित किया जा सके। एनसीईआरटी निदेशक ने कहा, ‘हमने पाठ्यपुस्तकों के युक्तिकरण पर जो काम किया है, वह 2005 NCF की समीक्षा का आधार बनेगा। समाज में बदलाव की जरूरत है और हमारा फोकस ‘एक्सपेरिमेंटल लर्निंग’ पर है।’

सरकार के सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनावों के नतीजों (23 मई) के बाद ही इसे लेकर आधिकारिक घोषणा की जाएगी। ऋषिकेश सेनापति ने बताया कि छात्रों, अभिभावकों और बुद्धिजीवियों की ओर से करीब 1 लाख सुझाव इस पर दिए गए जिनका बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा। यह करीब एक साल की लंबी प्रक्रिया होगी।

सुधारों की दिशा में ही दिसंबर 2019 तक एनसीईआरटी 42 लाख सरकारी एलीमेंट्री स्कूल के टीचर्स के लिए बड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भी विचार कर रहा है। काउंसिल ने त्रिपुरा में ऐसा कार्यक्रम आयोजित भी किया था जिसमें 31 हजार शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई।

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